218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जाए तो रैयत का पैसा तहसील की तिजोरी में ले जाकर महार लोग ही भरते थे। पिछले 150-200 सालों में इस बारे में किसी महार द्वारा बेइमानी किए जाने का कोई सबूत नहीं है। रात-बिरात और कड़ी धूप में यात्रा कर रैयत का पैसा महारों ने सरकारी तिजोरी में भर कर अपनी ईमानदारी दुनिया को दिखा दी है। ऐसी लगभग सभी बातों के बारे में सोचने के बाद मुंबई में कामगारों की हड़ताल में हुए गोली चलाने के बारे में पूछताछ समिति के सामने महारों पर जो बेईमानी और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए जा रहे हैं वे कितने सच हैं इसकी छानबीन करने का समय भी जरूर आएगा। गरीबी से परेशान समाज का व्यक्ति हाथ में हजारों रुपए होने के बावजूद किसी तरह की हेराफेरी नहीं कर सकता। ऐसे महार समाज का चरित्र कितना उज्ज्वल होगा इस बारे में मुझे प्रशंसा सुनाने की जरूरत नहीं है। जनता इन सभी बातों के बारे में सोचने की सामर्थ्य रखती है। साथ ही, समता सैनिक दल में काम करने वाले कुछ स्वयंसेवक मिलिट्री में नौकरी कर चुके हैं। कानून, अनुशासन वे अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे में समता सैनिक दल के स्वयंसेवकों पर आरोप लगाना बड़े साहस का या शरारत भरा काम ही कहा जा सकता है।
आखिर मैं हर सैनिक से कहना चाहता हैं कि सैनिक शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है। हम चलती चवन्नी छाप नहीं हैं यह साबित करने वाला है यह शब्द। दल में अपना काम करते हुए आपको यही सोचना होगा कि आप मिलिट्री में ही काम कर रहे हैं। जनसमुदाय हो सकता है कभी चलती चवन्नी-सा बर्ताव करे, लेकिन उनकी और आपकी कृति में जमीन-आसमान का फर्क होना चाहिए। क्योंकि सैनिक हमेशा अनुशासन का पालन करता है। किसी अधिकारी का दिया हुक्म अगर गलत लगे तो उसके खिलाफ शिकायत या उसका प्रतिकार करने से काम नहीं चलेगा। मैं आपसे बस इतना ही कहना चाहता हूं कि केवल अनुशासन के लिए समय पड़े तो सभी तरह के वाक्यों का धीरज के साथ सामना करने का आपका संकल्प इसके बाद भी समाज सेवा करते हुए जारी रखें।