152 30.1.1939 रियासतों का संविधान दोबारा लिख कर पूरे हिंदुस्तान को व्यापने वाली नागरिकता के निर्माण की जरूरत है - पुणे - Page 240

219

152

* रियासतों का संविधान दोबारा लिखकर पूरे हिन्दुस्तान को व्यापने

वाली नागरिकता के निर्माण की जरूरत है

दिनांक 30 जनवरी, 1939 को पुणे के गोखले राजनीति-अर्थशास्त्र मंदिर का संस्थापक दिन मनाया गया। इस अवसर पर स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को ‘हिंदी फेडरेशन’ विषय पर भाषण देने के लिए खासतौर पर आमंत्रित किया गया था। इस विषय पर उन्होंने पुणे के गोखले स्मारक मंदिर में भाषण दिया। भाषण अंग्रेजी में हुआ। भाषण सुनने के लिए पुणेवासियों की गोखले स्मारक मंदिर की ओर भीड़ उमड़ पड़ी थी। तब श्री नारायणराव म. जोशी, एमए, एमएलए अध्यक्ष स्थान पर थे।

आचार्य धनंजयराव गाडगिल द्वारा डॉ. अम्बेडकर से बोलने की विनती की तो तालियों की गड़गड़ाहट हुई। लाऊडस्पीकर लगाए जाने के कारण उनका भाषण सब सुन पा रहे थे।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपना भाषण लिख कर ले आए थे। लेकिन पूरा भाषण पढ़कर सुनाना असंभव था। इसलिए उसमें से प्रमुख बातें पढ़कर सुनाईं और बाकी हिस्से का सारांश बताया। उन्होंने अपने भाषण में कहा-

सभ्य स्त्री, पुरुषों,

आज तक छात्रों की ओर से भाषण के दिए गए आमंत्रणों को मुझे नकारना पड़ा है। लेकिन इस संस्था के आमंत्रण को मैंने स्वीकारा। हो सकता है यह स्थिति विषमतामूलक भेदाभेद जैसी लगे लेकिन ऐसा नहीं है। वकील और सार्वजनिक कार्यकर्त्ता के नाते मुझे अपने काम सम्हालते हुए ऐसे आमंत्रणों का स्वीकार करना मुश्किल होता है। मैं केवल अध्यापक नहीं, राजनीतिज्ञ भी हूं। अध्यापक एक तरह से छात्र होता है। राजनीतिज्ञ केवल आंदोलनकर्त्ता होते हैं। मैं आंदोलनकर्त्ता भी हूं और छात्र भी हूं। अध्यापक अखबार की तरह होता है और राजनीतिक नेता मतपत्र की तरह होता है। मुझे एक तरह के मतपत्र के प्रचार का यह मौका मिला, खास कर मेरे प्रिय विषय पर बोलने का मौका मिल रहा था इसलिए मैंने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकारा।

1935 का जो संयुक्त संविधान हिंदुस्तान पर लादा जाने वाला है उसका स्वरूप बड़ा विचित्र है। इस हिंदी फेडरेशन का स्वरूप राक्षसी होने वाला है। अमेरिका के संयुक्त राज्यों,

* जनताः 4 फरवरी, 1939