97 16.1.1937 ये पद सम्मान के नहीं, कुछ कर दिखाने के हैं - इगतपुरी - Page 24

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उम्मीदवारी के समर्थन में छोटा-सा भाषण दिया। वहां के लोगों ने डॉ. बाबासाहेब को फूलमाला अर्पण की ओर फलाहार भी दिया। तांबट के औझर में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का जुलूस गांव की प्रमुख सड़कों पर चला। जुलूस में सुस्वर वाद्य बज रहे थे और नारे भी लगाएं जा रहे थे। वहां महार बस्ती में अपने भाषण में डॉ. अम्बेडकर ने श्री गायकवाड की उम्मीदवारी के लिए अपना समर्थन दिया। वहां से आगेखेरवाडी, चांदोरी, सायखेडा, चाटोरी, नायगांव आदि जगहों पर डॉ. अम्बेडकर को फूलमालाएं अर्पण की गईं। रात 8ः30 बजे सिन्नर की प्रमुख सड़कों पर मोटर में डॉ. अम्बेडकर का जुलूस निकला। रात 9.30 बजे सभा शुरू हुई। पहले श्री दौलतराव जाधव, पुंजाजी नवसाजी जाधव और रघुनाथराव रिपोटे के श्री भाऊराव गायकवाड की उम्मीदवारी के समर्थन में भाषण हुए। आखिर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठखड़े हुए। पहले उन्होंने बताया कि आगामी चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं और सबको कितने एहतियात से बरतना होगा। फिर उन्होंने बताया कि अपने जिले से श्री भाऊराव गायकवाड को ही जिताना कैसे आवश्यक है। फिर सिन्नर तालुका संघ के अध्यक्ष श्री बापुटाव भालेराव के यहां डॉ. बाबासाहेब और स्काऊट मंडल को मेजबानी दी गई। वहां से नासिक स्टेशन की ओर लौटते हुए शिंदे के मराठा और महार लोगों की ओर से डॉ. बाबासाहेब को फूलमालाएं अर्पण की गईं। साथ ही पलसे के लोगों ने भी उन्हें फूलमालाएं अर्पण कीं।

इसप्रकार अखिल भारतीय अस्पृश्यों माने गए समाज के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा विधि मंडल चुनावों के बारे में नासिक जिले का दौरा करते हुए इगतपुरी, कैंप देवलाती, नासिक, दिंडोली, वरखेडा, पिंपलगांव, बसवंत, ओझर, तांबट, सिन्नर आदि कई जगहों पर जो भाषण दिए उन्हें यहां संक्षेप में दिया जा रहा है-

प्रिय भाई-बहनों,

आज आप सभी को यहां बुलाए जाने की वजह आपको हैण्डबिल के जरिए बता ही दी गई है। मुंबई विधानसभा के अगले चुनावों में आप किसे अपना मत देकर चुनाव जिताएं इस बारे में हमें सोचना है। इस देश में कई राजा हुए। अंग्रेजों को भी यहां आए 150 वर्ष बीत चुके हैं। अंग्रेजों के 150 सालों में से पिछले 60 सालों से ये कौंसिलें काम कर रही हैं। इन कौंसिलों के द्वारा जनता के प्रतिनिधि अपने लोगों की शिकायतें सरकार के सामने रखते आए हैं। लेकिन अस्पृश्यों माने गए आठ करोड़ लोगों की ओर से उनकी शिकायतें कौंसिल में ले जाने वाला कोई प्रतिनिधि अब तक नहीं हुआ है। यही बात आज अपनी कोशिशों से होने जा रही है। आगामी अप्रैल, 1937 से शुरू होने वाले विधि मंडल के लिए नासिक जिले के लोगों को अधिकार मिला है कि वे अपना एक प्रतिनिधि भेजें। इस बार जब कौंसिल चलेगी तब अपना सुख-दुख वहां तक ले जाने का मौका हमें मिला