153 21.2.1939 शराब पर पाबंदी लगाने से अधिक महत्वपूर्ण है शिक्षा का मसला - मुंबई - Page 244

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* शराब पर पाबंदी लगाने से अधिक महत्वपूर्ण है शिक्षा का मसला

मंगलवार, दिनांक 21 फरवरी, 1939 को मुंबई प्रांतीय एसेंब्ली के बजट पर चर्चा के लिए, स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता डॉ. बाबासाहेब अंम्बेडकर भाषण करने वाले हैं इसका पता चलते ही दर्शक गैलरी में बहुत भीड़ हुई थी। स्वतंत्र लेबर पार्टी के मुख्य कार्यकर्त्ता भी वहां मौजूद थे।

सवाल-जवाब और उसके बाद श्री बांद्रेकर का पहले दिन का बजट के बारे में बचा हुआ भाषण पूरा होने के बाद तालियों की गड़गड़हट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ खड़े हुए। अपने भाषण की शुरूआत में उन्होंने बताया कि आज का बजट काँग्रेस सरकार का तीसरा बजट होने के बावजूद मेरी राय में वह पहला ही है। क्योंकि पहले दो बजट पेश करते हुए काँग्रेस, अपने हालात के बारे में सही-सही अंदाजा नहीं लगा पाती। उस वक्त हालात भी कुछ अलग से थे। लेकिन इस वर्ष का बजट बनाते वक्त उनके पास पर्याप्त समय था। उसे लागू करने के लिए पर्याप्त साधान थे और सोचने का मौका भी मिला था। इन सभी बातों के बारे में सोचते हुए लगता है कि आज का बजट ही पहला बजट है। इस प्रकार बजट के बारे में भूमिका बांधने के बाद वह बजट के बारे में बोले। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बजट ‘‘जमा पूंजी के नजरिए से गैर-जिम्मेदार और खर्चे के हिसाब से नादानी भरा है।’’ उसके बाद वह बजट के एक-एक बिंदु पर चर्चा करने लगे। पहले उन्होंने बजट में जिन पर काँग्रेस सरकार ने कर लगाया था उनका अपने भाषण में इस प्रकार विभाजन किया-

  1. कोर्ट फी और स्टैंप ड्युटी पर लगने वाला कर।

  2. बिजली पर लगने वाले कर में बढ़ोतरी।

  3. शहर के मकानों पर लगने वाले टैक्स में वृद्धि।

  4. अचल संपत्ति की लीज पर टैक्स।

  5. मुंबई और अहमदाबाद की अचल संपत्ति के किराए में सेंकड़ा 10 प्रतिशत की

बढ़ोतरी।

  1. बिक्री कर।

’जनताः 25 फरवरी, 1939