224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस मुद्दे पर भाषण करते हुए उन्होंने कहा कि-‘‘सरकार ने कोर्ट फी और स्टैंप ड्डूटी जोड़ने के लिए जिस प्रकार कर लगाने की योजना बनाई है उसे देखकर पिछले विधिमंडल का इतिहास मेरी आंहों के आगे आता है। उस वक्त आज कर की योजना बनाने वाले काँग्रेस ही इसके खिलाफ थे। उस वक्त की उनकी नीति देखें तो केवल प्रतिपक्ष पर हमला करने के लिए ही उन्होंने अपनी शक्ति का प्रयोग किया कहूं तो वह अत्युक्ति नहीं होगी। और अब हाथ में सत्ता आते ही पहले जो बातें बुरी लगती थीं वही जनता का हित करने के लिए तैयार उन्हें अब अच्छी लग रही हैं।
मेरी राय में बिजली पर लगने वाला कर अनिष्ट है। यह मेरी ईमानदार राय है। इस कर के कारण जनता का आर्थिक नुकसान तो होगा ही साथ ही सेहत के मोर्चे पर भी यह कर गरीबों के लिए नुकसानदेह साबित होने वाला है। अतिरिक्त खर्च की चिंता में लोग मिट्टी के तेल के दिए इस्तेमाल करने लगेंगे। मिट्टी के तेल के दिए इस्तेमाल करने से इंसान के स्वास्थ्य पर अनिष्ट असर होता है यह बात काँग्रेस को पता नहीं हो ऐसी बात नहीं है। तत्वों के ख्याल से भी इस सरकार को ऐसी योजना बनानी चाहिए ताकि बिजली पर कर लगाना ना पड़े। पहले 12 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वालों पर यह नया कर लागू नहीं था लेकिन अब के बजट में उस पर भी कर लगाया गया है। गरीबों और मध्यमवर्ग पर कर का बोझ लादा गया है लेकिन सिनेमा-नाटक गृहों पर नहीं लगाया। कर बढ़ाने के चक्र से उन्हें मुक्ति दी गई है। सिनेमा और नाटकगृहों पर कर लगता तो गरीब जनता की जगह वह विलासिता के साधनों पर लगता। सोचने पर पता चलता है कि यह सरकार गरीबों पर इस प्रकार भारी कर लगाने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
शहर की अचल संपत्ति पर कर लगाया गया है। काँग्रेस सरकार को यह नया कर लगाने की जरूरत क्यों महसूस हुई है? सभी अंगों से सोचने पर लगता है कि मुंबई, मुंबई के उपनगर और अहमदाबाद कीअचल संपत्ति पर लगाया जाने वाला कर हर तरह से आक्षेपाई है। यह कर लगाकर सरकार ने स्थानीय संस्थाओं को मुश्किल में डाला है। उनकी आय पर गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में हमला किया है। सरकार की नीति स्थानीय स्वराज संस्थाओं की उन्नति पर रोक लगाने वाली है। मुंबई के किराएदार पिछले कई दिनों से घर का किराया कम कराने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा मकान मालिकों पर ही यह नया कर लादा जा रहा है इसलिए भी किराएदार निराश हैं। मकान मालिकों को आजकल साढ़े अठारह प्रतिशत कर महापालिका को देना पड़ता है। जगह अगर लीज पर ली गई हो तो उसका अलग से किराया सरकार को देना पड़ता है। इसी प्रकार किराए की आमदनी से हिंदुस्तान सरकार को ‘आय कर’ देना ही पड़ता है और इन सभी को मौटे तौर पर गिना जाए तो वह आय की 50 प्रतिशत तक जाती है।