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ऐसे हाल में मकानों में रहने वालों पर और 10 प्रतिशत बिजली कर लादना मूर्खतापूर्ण है। म्युनिसिपालिटी को हम जो कर देते हैं उससे म्युनिसपालिटी से हमें पानी मिलेगा, सड़कों की मरम्मत होगी, सड़कों परा रोशनी की जाएगी लेकिन सरकार के नए कर से क्या लाभ होगा?
इसके बाद डॉक्टरसाहेब ने रेंट और टैक्स का अर्थ स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘मालिकों को जो कर अदा करना पड़ता है उसे वे अपने निर्जीव मकानों से नहीं वसूल सकते। इसलिए यह नया कर लोगों के ही मम्थ्ये मढ़ा जाने वाला है। छोटे-बड़े सभी मकान मालिकों से यह कर वसूला जाने वाला है। ऐसे में छोटे घर बनाकर उनके जरिए अपनी उपजीविका कमाने वाले और बड़ी-बड़ी इमारतें बनावाकर लाखों का मुनाफा कमाने वाले मालिकों पर कर लादना कया सही बात है? इसी प्रकार मुंबई की ‘स्पेशल सर्विस लीग ऑफ इंडिया सोसाइटी’’ जैसी सार्वजनिक और लोगों की सहायता करने वाली संस्थाओं की इमारत पर भी कर लगाया है। पदार्थों को बिक्री पर कर लगाने की जरूरत काँग्रेस सरकार को क्यों लगे? इस कर से चीजें खरीदने वालों को फर्क पड़ेगा। और इसका असर उनके जीवन स्तर पर भी पड़ेगा। इन करों से सरकार हासिल क्या करना चाहती हैं? इस कर के बारे में सोचते हुए थोड़ा इतिहास खंगालना पड़ेगा। 1800 से 1894 तक एक्साइज टैक्स लादा जाता था। आज काँग्रेस सरकार ने उसी को अलग जामा पहनाया है। इस नए कर से लोगों के जीवन स्तर-पर असर होगा। साथ ही यह कर कारखाने के मालिक और मिल मालिकों को अगर देना पड़ा तो देश के उद्योगों पर उसका विपरीत असर होगा।
जरूरी करों को लागू करने का मैं कभी विरोध नहीं करूंगा लेकिन काँग्रेस सरकार ने विशिष्ट लक्ष्य की आपूर्ति के लिए यह 169 लाख रु. का नया कर बटोरने की योजना बनाई है। उससे जनता को प्रत्यक्ष रूप से क्या लाभ मिलने वाला है? बजट में बताए गए नए खर्चों को अगर देखें तो उसमें (1) शिक्षा के लिए डेढ़ लाख रुपए, (2) सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पानी की आपूर्ति आदि में 5 लाख रुपए, (3) सहकारिता आंदोलन के लिए 7 लाख रुपए (4) कर्ज निवारण के लिए 2 लाख रुपये आदि बातें प्रमुख हैं। इन सभी कामों के लिए केवल 40 लाख रुपए खर्च कर बाकी 125 लाख रुपए शराब पर पाबंदी लगाने के लिए आरक्षित रखे हैं। लेकिन ऊपर बताई गई लोक-कल्याण की बातों से शराब पर पाबंदी की नीति पर खर्च करना क्या योग्य होगा?
शराब की पाबंदी पर 125 लाख रु. खर्च करने लायक क्या यह मसला आपातिक है? इस बारे में अगर हम सोचें तो सरकार की यह नीति अविचारपूर्ण और दुःसाहसी है ऐसा लगता है।
शराब पर पाबंदी लगाने की बात का महत्व हमारे प्रांत में बढ़ा-चढ़ा कर आंका जा