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में लोगों का जीवन पीने के पानी के बगैर कष्टपूर्ण और दुःखी हुआ है। गांव के अपने गरीब भाइयों का जीवन सुखी हो इसलिए शहर के लोगों पर कर चढ़ा कर इक्ट्ठा की गई रकम का उपयोग शराब पर पाबंदी के बजाय गांव के लोगों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए क्यों नहीं किया जाता?
इस प्रांत के भू-राजस्व से मिलने वाली आय 3 करोड़ 18 लाख 63 हजार (3,18,63,000) रुपए हैं। पिछले वर्ष काँग्रेस सरकार ने भू-राजस्व में 10 लाख रुपयों की छूटी दी थी और इस वर्ष 40 लाख रुपयों की छूट देने का विचार है। अन्य कर लगाकर सरकार अगर पूरा जीवन राजस्व निरस्त कर दे तो हम बजट का विरोध खुशी-खुशी त्याग देंगे। (हियर-हियर) इस देश के मद्रास, बिहार, उड़ीसा आदि प्रांतों का क्षेत्रफल देखें तो मुंबई प्रांत छोटा है। हमारे प्रांत की जमीन हर तरफ जोताई में लगी हुई है। ऐसे में खेती के बजाय उद्योगों में बढ़ोतरी होना आवश्यक है।
चरखे जैसे मसले को महत्व देना सही नहीं है। बाजार की प्रतिस्पर्धा में अपनी जमीन पर न बना पाने वाली खादी ग्रामोद्धार का मसला आसानी से हल नहीं कर सकती। इन सभी बातों पर सूक्षमता से गौर करने के बाद मैं कहूंगा कि इस देश में औद्योगिकीकरण का विरोध करने वाले लोग सतही तौर पर भले मित्र हों लेकिन असल में शत्रु ही हैं। साथ ही, सरकार का यह बजट बनाना यानी मन ही मन गणपति की मूर्ति बनाने वाले कुम्हार के हाथों आखिर बंदर की मूर्ति बनी है ऐसा दृश्य दिखाई देगा। (तालियां) यहां डॉ. बाबासाहेब ने करीब सवा घंटे तक भाषण दिया।