154 26.2.1939 जिलावर आंदोलनों से संगठन शक्ति कमजोर हो जाएगी - चेंबूर (मुंबई) - Page 249

228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* जिलावार आंदोलनों से संगठन शक्ति कमजोर हो जाएगी

26 फरवरी, 1939 की शाम को चेंबूर, मुंबई की अस्पृश्य समाज संगठन संस्था की ओर से स्वतंत्र लेबर पार्टी के सचिव भाई डी.वी. प्रधान की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया था। उस समय स्वतंत्र लेबर पार्टी के मुंबई प्रांत एसेंब्ली के विधायक, मुंबई म्युनिसपालिटी में चुने गए प्रतिनिधि तथा विविध वृत्त के संपादक रामभ­ ाऊ तटनीस हाजिर थे। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर तालियों की गड़गड़ाहट में बोलने के लिए उठ कर खड़े हुए।

पहले उन्होंने चेंबूर के कामगारों का अभिनंदन किया कि उन्होंने बड़े प्रेम और आस्था के साथ इमारत फंड के लिए रुपया इक्ट्ठा किया। आगे उन्होंने कहा-

‘‘इस फंड का क्या महत्व है यह मुझसे पहले जो बोले उन्होंने स्पष्ट किया है। इस फंड के लिए कम से कम दो लाख रुपए जोड़ना जरूरी है। अब तक जमा की गई रकम इस काम के लिए बेहद कम है। इस फंड के बारे में जब मेरे मन में ख्याल आया तब पहले मुझे आखिरी बाजीराव की दानशूरता की याद आई। उसने एक भिक्षुक को उसे संतोष होने तक उसके सिर पर रुपये उंडेल कर दान दिया था। यह पढ़ने के बाद मेरे मन में ख्याल आया कि कोई इस फंड में इस प्रकार दान देने के लिए तैयार हो तो चाहे जितने कष्ट झेल कर मैं अपने सिर पर रुपए गिरा लेने के लिए तैयार हूं। भिक्षुवृत्ति को स्वीकार किए बगैर इस इमारत फंड की पूर्ति होना संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने चेंबूर के अस्पृश्य कामगारों के 1926 से 1939 के दरमियान के जीवन की भयानकता का वर्णन किया। पुरानी गंदी बस्ती में इंसान और कचरे के बीच कभी भेदभाव दिखाई नहीं देता था। उसकी तुलना में इधर दस सालों में काफी संतोषजनक बदलाव दिखाई देता है। आज शिक्षा, सुधार आदि मामलों के कारण अपने समाज में हुआ सुधार अभिनंदनीय है प्रशंसा योग्य है। बच्चों को आज से अधिक शिक्षा दिलाने के लिए कोशिशें करना जरूरी हैं। 10 साल पूर्व आपकी हालत में सुधार लाने के लिए कामगारों का संगठन नहीं था। म्युनिसिपालिटी में आपके अपने प्रतिनिधि नहीं थे। लेकिन पिछले चुनावों में म्युनिसपालिटी में अपनी स्वतंत्र लेबर पार्टी के पांच-छह प्रतिनिधि चुने गए हैं। इस बार मैंने गणपत बुवा जाधव को चुनाव में खड़ा किया था। दुर्भाग्य से वह चुनाव हार गए। लेकिन मुझे यकीन है कि वह अपने कामगार बंधुओं की खातिर अपूर्व काम

’जनताः 4 मार्च, 1939