232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* वार्डों में बंद जानवरों से रियासतों में रहने वाले लोगों की स्थिति
अलग नहीं
स्वतंत्र लेबर पार्टी के जनक डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सहयोगी मेसर्स गडकरी, सावंत, देवरूखकर, गायकवाड, के. बी. जाधव, शामराव भोले आदि लोगों के साथ फलटण के लिए निकले थे। रास्ते में लोणंद में श्री बाबासाहब खरात ने उनका आदरपूर्वक स्वागत कर सम्मान के साथ उन्हें पान-सुपारी दी। इस अवसर पर श्री सावंत और भाऊराव गायकवाड़ के भाषण हुए। अपने भाषण में उन्होंने संक्षेप में बताया कि क्यों सबको स्वतंत्र लेबर पार्टी का सदस्य बनना चाहिए। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनने की विनति की। उनके बाद बोलते हुए श्री आबासाहब खरात ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब मेरी विनती का सम्मान करते हुए पिछली सारी बातें बुला कर यहां आए इसका मुझे बहुत संतोष है। डॉ. बाबासाहेब के बारे में अपने मन में बसी भक्ति को व्यक्त कर उन्होंने बाबासाहेब को पुष्पहार अर्पण किया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब ने उक्त समारोह के आयोजन के लिए आबासाहब के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद देते हुए उन्होंने बताया कि- एसेंब्ली चुनाव के समय सातारा जिले के स्वतंत्र लेबर पार्टी के उम्मीदवार श्री
खंडेराव सावंत की मदद के लिए जब मैं दौरे परर आया था तब श्री सावंत के खिलाफ चुनाव मैदान में श्री आबासाहब खरात के बड़े बेटे उतरे थे। सो कर्तव्य के तौर पर मुझे
खरात की खबर लेनी ही पड़ी थी। इसके बावजूद उस बात को सार्वजनिक काम का अंग मानते हुए उन्होंने वह सब भुला दिया यह बहुत संतोषजनक बात है। सभी सार्वजनिक कार्यकर्ताओं को उन्हीं का अनुसरण करना चाहिए। वहां इक्ट्ठा लोगों को फूलमालाएं और पान-सुपारी देने का कार्यक्रम हुआ और उसके बाद खरात के यहां खाना खाकर डॉ. बाबासाहेब फलटण के लिए निकले। 23 अप्रैल, 1939 को वे फलटण पहुंचे।
फलटण संस्थानाधिपति ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को पहले ही पत्र भेज कर चाय-पान का आमंत्रण दिया था। तय कार्यक्रम के अनुसार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर वहां मेसर्स गडकरी, देवरुखकर, गायकवाड, रणपिसे, सावंत, के. बी. जाधव, शामराव भोले आदि लोगों के साथ ठीक 4 बजे फलटण संस्थानाधिपति की खास मोटर से राजमहल में आए। वहां राजेसाहब के साथ उनकी सार्वजनिक कामों के बारे में थोड़ी बातचीत हुई। बातचीत के बाद बढि़या, शाही चायपार्टी हुई। चायपार्टी के बाद डॉ. बाबासाहेब के साथ राजमहल में राजेसाहब और मेहमानों का फोटो खींचने का कार्यक्रम हुआ। शाम 5 बजे राजमहल से बड़ा जुलूस निकला और सभामंडप तक आया। सभा के लिए भव्य
* जनताः 6 मई, 1939