157 23.4.1939 बाड़ों में बंद रहने वाले जानवरों से रियासतों के लोगों की स्थिति अलग नहीं - लोणंद (फलटण) - Page 254

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मंडप और मंच तैयार किया गया था। रियासत के सभी बड़े लोग सभा में उपस्थित थे। उनमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी थीं। शुरू में स्वागत के पद और पोवाडे गाए गए। श्री गायकवाड़ ने डॉ. बाबासाहेब और अन्य उपस्थित लोगों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि संगठित रहना कितना हितावह और महत्वपूर्ण है। आखिर उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर से अध्यक्षास्थान स्वीकरने की विनति की। तालियों की गड़गड़ाहट हुई जब डॉ. बाबासाहेब अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। सभा में फलटण तथा आसपास के इलाके से दस-बारह हजार लोग उपस्थित थे।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ खड़े हुए तब तालियों की गड़गड़ाहट हुई। उन्होंने कहा-

फलटण रियासत के अस्पृश्य माने गए लोगों की परिषद के लिए मैं भले यहां आया हूं लेकिन मैं कहता हूं कि आम जनता का कर्तव्य क्या है, इस दुनिया में क्या चल रहा है....... यह जाने बगैर भी नहीं चलेगा। आम लोग आजकल जनतंत्र की भाषा बोलते हैं। रियासत में तथा रियासत से बाहर जनतंत्र के सिद्धांतों के आधार पर सुधार पाने और ले आने की कोशिश करती है। ऐसे में रियासतदारों को भी अपनी सोच बदल कर प्रजा को जितने अधिक अधिकार देना संभव हो देने चाहिए।

आज की रियासतें पुराने राज्यों के अवशेष हैं। पुराने जमाने में राजाओं को अगर कोई सीख मिलती थी तो वह यही कि वे गो-ब्राह्मणों का प्रतिपालन करें। उस जमाने में राजाओं का यही प्रमुख कर्तव्य माना जाता था। गो-ब्राह्मण प्रतिपालन करना यानी गायों को चारा खिलाना और ब्राह्मण जाति की रक्षा करना। इतना करने के बाद राजा का कोई और कर्तव्य बाकी है ऐसा नहीं समझा जाता था। गो-ब्राह्मण प्रतिपालन के अलावा राजा अगर और कुछ भी ना करे तब भी चल जाता था। आज रियासतों में रहने वाले लोगों के हालत को देखें तो पता चलता है कि उनका हाल बाड़े में बंधे मवेशियों से अलग नहीं। इसका दोष अगर किसी को जाता है तो वह हिंदू धर्म की सीख को ही देना पड़ेगा। चाणक्यनीति, मनुस्मृति आदि गं्रथों का अगर अवलोकन किया तो आपको पता चलेगा कि उन्होंने गांवों में पाठशालाएं खोलने, लोगों को सुविद्य बनाने या लोकहित के कुछ अन्य काम करना भी राजा के कर्तव्यों में शामिल होता है आदि बातों का जिक्र तक नहीं किया है। ये सभी बातें हमने अंग्रेजों से सीखी हैं यह बात मानने में शर्मिंदगी नहीं महसूस होनी चाहिए। प्राचीन काल के रामकृष्ण जैसे राजाओं का उदाहरण भी लें तो सोचिए कि लोगों में शिक्षा का प्रसार हो इसलिए उन्होंने कितने वजीफे दिए थे? फलटण रियासत की अपनी जनता ज्ञानहीन और अधिकारहीन है। हमारे लोगों के इस हाल के लिए अगर कोई जिम्मेदार हो तो वह है हमारा धर्म। देश के करीब 90 प्रतिशत लोग आज अज्ञान और गुलामी में दिन काट रहे हैं। इसके लिए हिंदू धर्म ही जिम्मेदार है। इतना ही नहीं हिंदुस्तान की आजादी