234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गंवाने के लिए और जो भी पराया राजा इस ओर आए उसे पहले शरण देकर आगे उसकी शरण जाने के लिए अगर कोई कारण हो तो वह हिंदु धर्म ही है।
कुछ पद्धति को नष्ट करने के लिए हमें क्या करना है यह आज का महत्वपूर्ण मसला है। इस बारे में अगर कोई कारगर इलाज बताना हो तो मुझे जो उपाय सूझता है वह यही है कि राज्य की सत्ता प्रजा के हवाले करना। इस बारे में मेरे विचार आपको हो सकता है थोड़े अजीब लगेंगे। लेकिन मैं उन्हें छिपाना नहीं चाहता। यहां अंग्रेजों का राज शुरू होकर लंबा समय बीतने के बाद यही लग रहा है कि लोक कल्याण अगर करना हो तो राजनीतिक सत्ता प्रजा के प्रतिनिधियों के हाथ होना ही योग्य है। इस बारे में लोगों की आकांक्षाएं हमेशा बढ़ती रही हैं। उन्हें ध्यान में रखते हुए उनका अनुसरण करते हुए जिन सुधारों पर अमल किया गया वे हमारे इस हिंदुस्तान देश में 1937 के अप्रैल माह से लागू हुए हैं। लेकिन मिले हुए जनतंत्र से इस देश का क्या हित हुआ है? सच बात तो यह है कि जनतंत्र से इस देश में रत्ती भर का फर्क दिखाई नहीं देता। विदेशी अंग्रेजों ने अपने राज में जो नहीं किया वह सब ये लोग करते हुए दिखाई देते हैं। जिन बातों के बारे में विदेशी अंग्रेजों को भी शर्म आती थी वे बातें लोगों से मिले वादों के आधार पर चुने गए अपने ही देश के नेताओं ने की है। निहत्थे सैनिकों पर गोलियां बरसाकर उन्हें जान से मार डालना पेट के लिए लड़ने वाले कामगारों की हड़ताल को अपराध करार देने वाला कानून अंग्रेज सरकार नहीं बना सकी थी जिसे काँग्रेस की सरकार बेझिझक बना रही है।
प्राचीन काल की गो-ब्राह्मणों के प्रतिपालन की सीख क्या आज भी लोगों के व्यवहार से निकल पाई है? आज सात प्रांतों में काँग्रेस की सरकार है। उन सभी प्रांतों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण हैं। इन सभी प्रांतों की सत्ता ब्राह्मणों के हाथों में है। ऐसे राज्यों में सबका कल्याण होगा कहना सरासर गप्प है। उनके हाथों सबका कल्याण होना असंभव है। क्योंकि जब तक इस देश में गरीबों के हितसंबंध अमीर वर्ग से अलग हैं, किसी एक वर्ग के हित में दूसरे का अहित है, जहां अमीरों के कल्याण के लिए काँग्रेस की सरकारें तत्पर हैं तब तक काँग्रेस सरकार के जरिए हमारा कल्याण होगा यह विश्वास किसानों और मजदूरों के मन में बना हुआ है तो वह इस वर्ग की अद्योगति है। आज मतदाता किसी क्रेय वस्तु की तरह लाभ के कारण अपना मत अमीरों को बेचते हैं। उनके मत खरीदने वाले अमीर मारवाड़ी और गूजर लोग हैं। ऐसे लोगों के हाथों में जब सत्ता जाती है तब वे अपना नुकसान करा के गरीब जनता का इस वर्ग द्वारा कल्याण होगा यह बात असंभव-सी लगती है। ऐसे जनतंत्र से बेहतर है अनियंत्रित सत्ता राजा के हाथ में होने वाली राजसत्ता। इस उक्ति को मानने जैसे हालात आज समाज में हैं। यूरोप के जर्मनी, टर्की, इटली आदि प्रांतों का भरपूर विकास हुआ है। ‘राजा कलस्य कारणम्’ के अनुसार देश की उन्नति और समृद्धि का कारण राजा ही होता है। कम से कम आज की तारीख में जर्मनी का हिटलर, टर्की का मुसोलिनी, इटली का कोमलपाशा ही अपने देश की उन्नति के कारण हैं। ऐसे राजाओं के हाथ में जब