238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* धर्मांतरण का एक उद्देश्य है अस्पृश्यों में व्याप्त जातिभेद को नष्ट
करना
रोहिदास शिक्षण प्रसारक समाज की ओर से चमार समाज की शिक्षक परिषद, रविवार 2 जुलाई, 1939 की शाम को आर.एम. भट्ट हाईस्कूल के हॉल में प्रि. दोंदे की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर आमंत्रित मेहमान के तौर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का विचारों से परिपूर्ण भाषण हुआ। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
मुझे लगा था आज की सभा का आयोजन रोहिदास समाज के उन छात्रों को पुरस्कार बांटने के लिए किया गया है जो विभिन्न परीक्षाओं में उर्त्तीण हुए हैं। इसीलिए मैं सभा में उपस्थित हुआ। लेकिन आज की सभा में लगता नहीं कि ऐसा कोई आयोजन है। फिर भी, चूंकि मैं यहां उपस्थित हूं और आपका आग्रह है कि मैं दो शब्द बोलूं इसलिए मैं आपके सामने छोटा-सा भाषण करूंगा।
पहले मैं एक महत्वपूर्ण बात आपसे कहता हूं कि मैं किसी भी विशिष्ट जाति के आंदोलन में हिस्सा नहीं लेता। सार्वजनिक काम की शुरूआत जब से की है तब से मैंने कभी जाति निष्ठा मानसिकता नहीं रखी। मैं एक महार के रूप में पैदा हुआ हूं लेकिन महार जाति को बनाए रखने के लिए मैं कभी कोशिश नहीं करता। मैं जो ‘जनता’ अखबार चलाता हूं उसके जरिए कभी मैंने ऐसी सीख नहीं दी। महार के रूप में क्या मुझे कौन-सी स्मृतियां जतन कर रखनी हैं? मेरी हमेशा यही कोशिश होती है कि महार अपने जाति बंधनों को तोड़ दें। मैं और मेरे अनुयायी अक्सर मांग, भंगी, चमार आदि विभिन्न जातियों के साथ रोटी व्यवहार करते हैं। जो जातिभेद मानता है मैं उसका तीव्र निषेध करता हूं। अन्य जातियों से भी यही कहता रहता हूं कि वे भी यही करें। विभिन्न जातियों में विवाह हों इसका हम हमेशा प्रचार करते रहते हैं। लेकिन विवाह जबरदस्ती से करने-करवाने की बात तो है नहीं। महार की बेटी और चमार के या भंगी के बेटे को पेड़ से बांध कर और उन पर घड़े-घड़े भर पानी उंडेल कर उनकी शादी नहीं कराई जा सकती। हालांकि अगर विभिन्न जाति के वधु-वर अगर स्व-खुशी से विवाह करना चाहें तो मैं हर तरह से उन्हें प्रोत्साहन दूंगा। उन पर होने वाले सामाजिक जुल्मों को कम करने की कोशिश करूंगा। यह हुई सामाजिक मामलों के बारे में बातें। राजनीतिक मामलों के लिए मैंने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की है। यह पार्टी सबके लिए खुली है। अभी
* जनताः 8 जुलाई, 1939