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सेवा मशहूर है। उन्होंने लोकल बोर्ड और नासिक म्युनिसिपलिटी जैसी स्थानीय स्वराज संस्थाओं में पिछले कई सालों से जिम्मेदारी के काम किए हैं। पिछले छहः सालों से अपने जिले के लोगों की शिकायतें सरकार के दरबार में पेशा कर उनके निवारण का कार्य वे करते आए हैं। अस्पृश्य माने गए समाज के आन्दोलन का नासिक जिला केद्र बना है। पिछले पांच-छह सालों से इस जिले में कितने आन्दोलन हुए इसकी जानकारी आपको है। इन सभी आन्दोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी के काम किए हैं यह आप देखते आए हैं। इन आंदोलनों के कारण कई बार उन्हें मारपीट सहनी पड़ी है, कई बार दंड देना पड़ा है तो कई बार कारागार जाना पड़ा है और सश्रम कारावास भी झेलना पड़ा है। श्री भाऊराव गायकवाड के किए कामों के मद्देनजर ही मैंने स्वतंत्र लेबर पार्टी की ओर से उनका नाम सुझाया है। श्री गायकवाड के खिलाफ श्री रामचंद्र रोकडेखड़े हैं। मंदिर-प्रवेश सत्यग्रह के दौरान वे कहां छिपे बैठे थे - जिसे सार्वजनिक सेवा कहा जाए ऐसा कुछ क्या उन्होंने कभी किया है - (लोग ‘नहीं-नहीं’ चि८ाते हैं।) 1935 के इंडिया एक्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि अबके बाद मुंबई विधि मंडल का कामकाज अंग्रेजी में ही चलेगा। अपनी कुछ शिकायतों अगर विधि मंडल के सामने रखनी हों तो अब अंग्रेजी में ही रखनी पडेंगी ऐसा नियम बनाया गया है। ऐसे में, अपनी शिकायतें अंग्रेजी में रखने जितनी अंग्रेजी क्या श्री रोकडे जानते हैं - (लोग चि८ाते हैं - नहीं-नहीं’।) रोकडे द्वारा जो विनती पत्रक जारी किया गया है उसमें वह साफ तौर पर कहते हैं कि मैं किसी भी पक्ष या संस्था की ओर सेखड़ा नहीं हूं। अगर रोकडे किसी भी पक्ष या संस्था की ओर सेखड़े नहीं है तो उन्हें उनके काम में मदद कौन करेगा - क्या ऐसे इंसान की हालत ना पशु-ना पंछी कहलाने वाले चमगादड़ जैसी नहीं होगी - इससे तो बेहतर था कि रोकडे सीधे कांग्रेस या तत्समय किसी और पक्ष की ओर से चुनाव में उतरते। ‘न यह ठीक-न वह ठीक’ की हालत अच्छी नहीं होती।
इन सभी बातों के बारे में सोचने के बाद सभी उम्मीदवारों में से विधि मंडल में जाने के लिए लायक कौन हैं और नालायक कौन है यह ढूंढ पाना बहुत आसान हो गया है। क्योंकि श्री भाऊ साहब गायकवाड और श्री रामचंद्र रोकडे की सार्वजनिक कार्य, बुद्धिमानी, कर्त्तव्यतत्परता अनुभव, शिक्षा आदि सभी तरहों से सोचा जाएः-
कहां राजा कहां गंगू तेली
कहां हिमालय पर्वत कहां कंकड
कहां सोना और कहां निक्कल
कहां घोड़ा और कहांखच्चर