97 16.1.1937 ये पद सम्मान के नहीं, कुछ कर दिखाने के हैं - इगतपुरी - Page 27

6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इतना फर्क दोनों के बीच है यह बात सूरज की रोशनी जितनी साफ है। इसके बावजूद आप क्यों दुविधा में पड़ते हैं - इसीलिए आप सभी अपने चारों मत श्री भाऊराव गायकवाड को ही दें यह मेरी आपसे विनती है।

मुझे पता चला है कि कुछ विरोधकों के प्रचारक कहते फिर रहे . . . . . . . .हैं कि आप अपने दो मत श्री गायकवाड को दें और दो मत श्री रोकडे को दें। क्योंकि दोनों उम्मीदवार अपनी ही जाति के हैं। इस बारे में मैं आपसे साफतौर पर कहना चाहता हूं कि इस जिले से हमें केवल एक ही उम्मीदवार को चुन कर भेजना है। इसलिए अपने मतों को इस प्रकार बांट कर काम नहीं चलेगा। आपको एक ही जगह के लिए उम्मीदवार चुनने के लिए दिए गए मतों को इस प्रकार बेमतलब बांटेंगे तो उसमें आपका नुकसान है नहीं, यह तो आत्मघात होगा। यह बात ना भूलें। इसी तरह आपके मतों के लिए लोग आपको रुपयों का लालच देंगे। अपना काम निकालने के लिए वे आपसे मीठी-मीठी बातें करेंगे। आपको झूठे वादे करेंगे। लेकिन आपको इनमें से किसी की बातों में नहीं आना है। मत का अधिकार आपकी मुक्ति का साधन है। मुक्ति का साधन आप अगर पैसे के लिए बेचेंगे तो आपके जैसे आत्मघाती, समाजद्रोही और मूर्ख केवल आप ही होंगे। इसीलिए कहता हूं, भाइयों और बहनों, किसी हालत में आपको मिला यह अधिकार पैसे के लिए ना बेचें, यह मेरी आपसे विनम्र बिनती है।

कल मैं जब यहां आया था तब कुछ लोगों को यह कहते सुना कि श्री रोकडे बहुत अमीर हैं इसलिए उन्हें ही अपने मत दें। इस बारे में मैं आपसे सफतौर पर कहना चाहता हूं कि, विधि मंछल अपनी अमीरी का प्रदर्शन करने की जगह नहीं है। वहां गरीब और अमीर, का भेद नहीं है। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ का न्याय वहां चलता है। इसीलिए अपने पक्ष की ओर से झगड़ने वाला सड़क का भिखारी वहां अमीरी और ऐसो-आराम में लोटने वाले नादान, आलसी और मूक अमीर से कई गुना श्रेष्ठ होगा। विधि मंडल के लिए जिस उम्मीदवार को चुनना है उसकी काबिलियत अमीरी में नहीं उसकी कर्त्तव्यतत्परता, समाज-सेवा और कड़ी तपस्या में आंकी जानी चाहिए। केवल अमीरी से प्रभावित होने के कोई मायने नहीं हैं। क्योंकि अमीर संभाजी रोकडे की मृत्यु के पश्चात् उनकी संपत्ति की विरासत उनके बेटे को मिली है। अमीर धोंडिबा रणखांबे की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति भी विरासत में उनके बेटों को मिली है। मेरी मृत्यु के बाद मेरी संपत्ति भी विरासत में मेरे बच्चों को मिलेगी। अगर ऐसी ही बात है तो ऐसी अमीरी से हमें आपको क्या लेना-देना - कई लोग कहते हैं कि विधि मंडल में बुद्धिमान और कर्त्तव्यतत्पर लोगों की ही जरूरत होती है। लेकिन ऐसा नहीं है। मराठा समाज के उम्मीदवार और पहले कौंसलर रहे व्यक्ति की ओर देख कर आप यह बात समझ जाएंगे। मैं इस बारे में कहना चाहूंगा कि मराठों का कोई भी गोल पगड़ी पहनने वाला