240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अस्पृश्यों को प्रवेश मिले इसलिए हम कर कोशिश की। उसमें थोड़ी-बहुत सफलता भी मिली। लेकिन उसमें अब तक जो उम्मीदवार शामिल हुए उनमें से महार उम्मीदवारों को चुन-चुन कर अलग कर दिया गया। उनसे अधिकारी सवाल पूछते हैं, कि तुमने कितने कुंओं को अपवित्र किया? इसलिए, आंदोलनों के कारण महारों का नुकसान ही अधिक हुआ है। मैं उसका बुरा नहीं मानता। महार आंदोलन करते हैं तो समूचे अस्पृश्य वर्ग के भले के लिए करते हैं। आंदोलन से उन्हें प्रत्यक्ष रूप से भले फायदा नहीं हुआ हो, लेकिन समाज जागरूक बनता है। उसकी उन्नति होती है। आंदोलन नहीं करने वाले लोग पिछड़ जाएंगे। चमार या मांगों से मैं बिल्कुल नहीं कहता कि वे मेरा अनुसरण करें या मेरे पीछे आएं। कोई मेरे साथ रहे या मुझे छोड़ कर जाए, मुझे उसमें आनंद या क्रोध नहीं होता। अपने सिद्धान्तों पर, अपने कार्यक्रम में मेरा विश्वास है। और मुझे यकीन है कि जो लोग मुझे छोड़ कर गए हैं वे भी मेरे कार्यक्रम के पीछे आएंगे। शिवतरकर मास्टर भी आएंगे। वह मुझे छोड़कर गए इसलिए मेरा उन पर गुस्सा नहीं है। न ही मैं उनके बारे में किसी से झूठ बोलता हूं। मैं जानता हूं कि वे मुझे गालियां सुनाते हैं। लेकिन मेरा यह कहना है कि शिवतरकर मास्टर मेरे साथ 12 सालों तक काम करते थे। इतने लंबे समय तक उन्हें मेरे जो दोष दिखाई नहीं दिए थे वे 13वें साल अचानक कैसे दिखने लगे? 12 सालों तक मेरे जिन दोषों के साथ उन्होंने मेरे साथ काम किया तब या तो मेरे कोई दोष थे ही नहीं या फिर ये भी तो क्षमा करने लायक थे। इसीलिए कहता हूं कि मेरी राह सबके लिए खुली है। मैंने धर्मांतरण पसंद किया। क्योंकि मैं चाहता हूं कि धर्मांतरण के बाद हमारे बीच का महार, मांग, चमार आदि जाति भेद नष्ट हों। धर्म बदलेंगे तो कम से कम महार, मांग, चमार आदि नाम तो हमसे चिपकेंगे नहीं। हम सब एक होकर उन्नति की राह पर आगे चलेंगे। आखिर में मैं आपको एक इशारा देना चाहता हूं और मानता हूं कि यही मेरा महत्वपूर्ण कर्तव्य है। काँग्रेस हिंदुओं की है। उसके नेता गांधी आपके साथ धोखा कर रहे हैं। ‘हरिजन सेवक संघ’ आपको गुलाम बनाने की कारस्तानी है। उससे आप सावधान रहें और आंखें खुली रख कर जिएं। इतना कह कर मैं आपसे विदा लेता हूं।