160 12.7.1939 कर बढ़ाकर होने वाली आय पर किसका हक? - मुंबई - Page 262

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* कर बढ़ाने से मिलने वाली आय पर किसका हक?

बुधवार दिनांक 12 जुलाई, 1939 की शाम को मुंबई के सर कावसजी हॉल में काँग्रेस सरकार की कर बढ़ाने की नीति का विरोध करने के लिए बुलाई गई सभा में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ।

डॉक्टर साहब ने कहा-

सरकार द्वारा लगाए गए नए कर अभूतपूर्व हैं। मुंबई सरकार के मंत्री अण्णासाहब लट्ठे द्वारा दिए गए आंकड़ों से इस बात का पता चलता है कि हिन्दुस्तान के विभिन्न प्रांतों में कर का अनुपात क्या हैं। बिहार में प्रति व्यक्ति रु. 1.4.0, बंगाल में रु. 1.12.0, असम में रु. 2.4.0, मध्यप्रांत में रु. 2.12.0, संयुक्त प्रांत में रु. 2.4.0, पंजाब में रु. 4.88.0, मद्रास में रु. 3.4.0, सिंध में रु. 4 और मुंबई में रु. 6 के अनुपात में कर देना पड़ता है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि मुंबई में कितना ज्यादा कर लगता है।

यह हुई हर प्रांत की बात। लेकिन करों में नई बढ़ोतरी केवल मुंबई शहर और उपनगरों पर ही लादी गई है। मुंबई शहर में आज तक प्रति व्यक्ति रु. 25 कर देना पड़ता है। नई दरों के कारण यह बोझ रु. 45 की रकम तक बढ़ेगा। कर की बढ़ोतरी के मामलों में यह अभूतपूर्व बात है। 1919 से लेकर आज तक मुंबई प्रांत में शिक्षा को मुफत और अनिवार्य बनाने का आंदोलन जारी है। इस प्रांत में 24,79000 बच्चे हैं जिनकी उम्र सकूल में पढ़ने की है। इस वर्ग में 6 से 11 वर्ष के बच्चों की ही गिनती की गई है। ऐसे कुल 24 लाख बच्चों में से केवल साढे सात लाख बच्चे का ही स्कूलों में दाखिला हुआ है। मुंबई प्रांत में 24000 गांव हैं और उनमें से केवल 8000 गांवों में ही स्कूल हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि मुंबई प्रांत में 17,00,000 बच्चे अज्ञान के अंधेरे में घुट रहे हैं और 16000 गांव अज्ञान के अंधकार में डूबे हुए हैं। जाहिर है कि ऐसे में सवाल पैदा होता है कि इन 17,00,000 बच्चों का क्या हमेशा के लिए अज्ञान के अंधेरे में घुटन के लिए छोड़ देना चाहिए? क्या सरकार को इन मासूमों के बारे में सोचना नहीं चाहिए?

अब किसानों को जो लगान देना पड़ता है उसके बारे में सोचते हैं। सरकार को लगान से 3,00,38,000 रुपयों की प्राप्ति होती है। लगान का यह बोझ बड़ा भारी है इसमें कोई दो राय नहीं। लगान देने के बाद किसान के पास कुछ बचता ही नहीं। सरकार से वसूले जाने वाले इस भारी लगान के बारे में आज तक केवल काँग्रेस ही हल्ला मचाती आई

* जनताः 15 जुलाई, 1939