244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अपनी सुरक्षा के लिए हिंदुस्तान समर्थ नहीं है। गोलमेज परिषद के दौरान हमने मांग की थी सुरक्षा विभाग को भी विधिमंडल के तहत लाया जाए। लेकिन अंग्रेज सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, कुछ नहीं किया। इतने भर के लिए काँग्रेस के साथ हम सहमत हैं।
दक्षिण अमेरिका के राष्ट्रों को जेरेमी बेंथम ने योग्य संविधान बना कर दिया लेकिन वह असफल रहा। कपड़ा जिस प्रकार सही नाप का होना जरूरी होता है उसी प्रकार योग्य संविधान होना भी जरूरी होता है। गृहमंत्री सम्माननीय मुंशी जी के साधारण डील-डौल वाले शरीर के नाम से बने कपड़े मुझ जैसे भारी-भरकम, मोटे शरीर के कैसे काम आएंगे? (हंसी) टेढ़े पैर का जूता सीधे पैर में फिट नहीं बैठेगा। इन बातों को ध्यान में रखते हुए जनतंत्र के बारे में सोचना चाहिए। जनतंत्र यानी बहुमत की सरकार। आज मुसलमान, अस्पृश्य अल्पसंख्य हैं और वे अल्पसंख्य ही रहेंगे। उनके साथ बहुसंख्यक हिंदु क्या सहनशीलता, समानता और बंधुत्व भरा व्यवहार करेंगे?
इस पर सम्माननीय खेर ने सहमतिसूचक गर्दन डुलाई। इस बात का जिक्र करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने उदाहरण बताए कि किस प्रकार अस्पृश्य समाज के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। उनहोंने कहा कि 1929 में असपृश्यों के हालात के बारे में पूछताछ करने के लिए नियुक्त कमेटी की रिपोर्ट बेहतर ढंग से बताती है कि 10 वर्ष पूर्व यहां कैसे हालात थे।
आगे उन्होंने पूछा कि क्या इन हालात में कोई फर्क आया है? सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान काँग्रेस ने कोन्सिल का बहिष्कार किया। उस वक्त वे कहते- कौंसिल में जाना हराम हैं। उसी प्रकार वह यह भी कहते थे कि ‘कौंसिल में कौन जाएगा? धेड जाएगा, चमार जाएगा।’’ (इस पर काँग्रेस के सदस्यों ने ‘नहीं, नहीं’ का शोर मचाया) । मैं इस बात का सबूत दे सकता हूं। आखिर उस वक्त टाइम्स को संपादकीय छापना पड़ा था। जाति भूला, धर्म भूला की डींगे हांकने वाले काँग्रेसियों की यही मानसिकता है। फिर मनु कानून को पूजनीय मानने वाले सनातनियों की राय क्या होगी इस बारे में सोचना ही काफी है।
इसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने अस्पृश्य वर्ग के साथ हो रहे अत्याचार, अन्याय, जुल्म आदि के 5-6 उदाहरण विस्तार से बताए। प्रांतीय राजनीति में बहुसंख्य हिंदुओं की वर्च स्विता कैसे है यह उन्होंने राजस्व विभाग के आंकड़ों के सहारे स्पष्ट किया।
इन सभी उदाहरणों को बताने के बाद उन्होंने कहा, नां. मुंशी की उपसूचना से सुरक्षा के तत्व को मान लिया गया है। लेकिन यह सुरा अस्पृश्यों के अधिकृत प्रतिनिधियों के लिए संतोषकारी होना जरूरी है। गृहमंत्री मानते हैं कि वह अल्पसंयकों के ट्रस्टी हैं।