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हमारे ट्रस्टी और संरक्षक और कोई नहीं हैं। इसलिए उनकी उप-सूचना को मैं मंजूर नहीं कर सकता। दूसरी उपसूचना में सांसद मुंशी ने हमेशा कहना आधा मान लिया है। आज की राज्य व्यवस्था आर्यों के चातुर्वर्ण्य जैसी है। वे तत्व हैं-क्षत्रिय राज्य चलाएं, ब्राह्मण ज्ञानदान करें, वैश्य व्यापार करें शूद्र और अतिशूद्र सेवा करें। वैश्यों ने अब राजनीति का भी व्यापार शुरू किया है। (हंसी) लेकिन शूद्रों की हालत में कोई फर्क नहीं आया है। इस अन्याय के खिलाफ मेरा खून खौलता है। सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक वर्चस्विता के साथ राजनीतिक वर्चस्विता लादने का मैं खून की आखरी बूंद तक विरोध करूंगा। (तालियां) आजादी का मतलब केवल उच्चवर्णियों को स्वतंत्रता और हम पर अधिराज्य ऐसा कभी नहीं हो सकता।
आयर्लैंड के अलस्टर प्रांत के लोगों ने ‘सुरक्षा नहीं स्वतंत्रता चाहिए’ का आग्रह किया था। उसका उदाहरण देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा- ‘‘मैं यह नहीं मांगता, हमें जरूरी सुरक्षा दें यही हमारी मांग है। निजी स्वार्थ से देश बड़ा है। मैं अगर अपने स्वार्थ को पूरा करने के पीछे पड़ता तो आज शायद कहीं होता। मेरे लिए दो बातें पूजनीय हैं- देश और जिस जाति में पैदा हुआ, बढ़ा वह अस्पृश्य जाति। अपने समुदाय के लिए मैं बाकी सभी बातों का त्याग करने के लिए तैयार हूं।
बाद में उन्होंने साफ किया कि मुस्लिम लीग जनतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ भले हो स्वायत्तता के खिलाफ नहीं। जनतंत्र, राजसत्ता आदि सब संविधान के प्रकार हैं। स्वायत्तता मुख्य तत्व है ऐसा उन्होंने कहा।
आखिर उन्होंने कहा कि, सम्मानीय मुख्य प्रधान बेहतर कूटनीतिक हैं। लेकिन मंत्रीमंडल के इस्तीफे के लिए उन्हें विधिमंडल की इजाजत क्यों चाहिए यह मेरी समझ में नहीं आ रहा। यह उनकी पार्टी का मसला है। इस्तीफा देने के लिए अगर उन्हें मेरी इजाजत की जरूरत हो तो मेरे बुलाए बगैर न आने की शर्त मानने के लिए क्या वह तैयार हैं?