163 24.12.1939 युवकों, निर्भंय बनोऋ स्वाभिमान डिगने न दो - अंकलखोप (सातारा) - Page 275

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पार्टी का उदाहरण हम लें। जो गैर-ब्राह्मण काँग्रेस में शामिल हुए उनसे मेरा सवाल है कि उन्होंने क्या पाया? आगे जो आंकड़े मैं दे रहा हूं उनसे पता चलेगा कि गैर-ब्राह्मणों का काँग्रेस के पीछे चले जाना आखिर केवल भुलावा ही साबित हुआ है। गैर-ब्राह्मणों की जनसंख्या 75 प्रतिशत है, और पक्षों की जनसंख्या ज्यादा से ज्यादा 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

मुंबई विधिमंडल में 27 ब्राह्मण सदस्य हैं। मंत्रीमंडल में तीन ब्राह्मण मंत्री हैं। प्रांत के 75 प्रतिशत गैर-ब्राह्मणों के लिए इस मंत्रीमंडल में एक ही ‘दृष्टि मणि’ यानी नजर न लगे इसलिए लगाया जाने वाला टीका है। इसीसे पता चलता है कि काँग्रेस में शामिल हुए गैर-ब्राह्मणों को आखिर क्या मिला?

राजस्व विभाग का भी यही हाल है। इलाके के उत्तर दिशा के हिस्से में चौबीस मामलतदारों में से दस मामलतदार ब्राह्मण हैं। अन्य हिस्सों में भी ऐसी विषमता ही दिखाई देती है। इससे यही बात साबित होती है कि हिंदी राजकाज को फिर भले वह अंग्रेजों द्वारा चलाया जाए या काँग्रेस के हाथ में बागडोर हो-जाहिर है कि ब्राह्मणबाधा हुई है। ब्राह्मण्य महाभयंकर विष है। हलाहल से भी वह भयंकर है इसलिए शंकर भी इसे पचा नहीं सकता। इस विष के इलाज के रूप में बुद्ध ने अवतार धारण किया। ब्राह्मणवाद पर हमला किया। आज के काँग्रेसी गैर-ब्राह्मणों को छकाने के लिए ‘रे मार्केट’ को ‘फुले मार्केट’ बनाते हैं। इसी प्रकार बुद्धकालीन ब्राह्मणों ने ‘इंद्र, अग्नि, वरुण’ आदि वैदिक देवताओं की जगह ‘राम, कृष्ण’ आदि क्षत्रिय देवों की रचना की और अपने युग के ब्राह्मण्य विरोधकों को छका कर अपना आसन स्थिर किया। जो हो, अगले चुनावों में अपने विभाग से एक उम्मीदवार को जिता दें और राजनीतिक सत्ता को हासिल करने की राह पर आगे बढ़ें। दरिद्रता के कारण हमारे छात्रों को कई मुसीबतों को झेलना पड़ता है। इस प्रकार मुश्किलों का सामना करने वाले छात्रों को बरगला कर उन्हें स्वाभिमान शून्य बनाने के लिए श्री भाऊराव पाटील और हरिजन सेवा संघ ने जगह-जगह जाल बिछाए रखे हैं। भीष्माचार्य जैसा वीर कौरवों का अनाज खाने के कारण पांडवों के न्यायपूर्ण पक्ष में नहीं आ सका। इस बात को ध्यान में रखें। ‘अर्थस्य पुरषे दासः’ जैसी अपनी हालत मत बनाइए। अपने लोगों द्वारा चलाए जा रहे बोर्डिंग के लिए ही मदद दें। उसका फायदा भी लें। सातारा जिले में मेरे मित्र श्री सावंत ने एक बोर्डिंग खोला है। आप लोग इस संस्था की भरपूर मदद कीजिए। गरीब छात्रों को उसका फायदा दिलाएं। यही मेरी आप सभी से आग्रहपूर्वक विनती है।