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* सभी पिछड़ी जातियां एकजुट होकर काम करें
25 दिसम्बर, 1939 को बेलगांव में मुस्लिम लीग की ओर से मु.अ. जिन्ना की जयंती मनाई गई। इस कार्यक्रम में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को भी आमंत्रित किया गया था। सभा में अध्यक्ष बने थे बेलगांव के मौलाना कुतुबुद्दीन अहमद। तीन हजार से अधिक लोगों ने इस सभा में हिस्सा लिया।
अध्यक्ष की विनती के अनुसार तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा-
अध्यक्ष महाराज और मुसलमान भाइयों,
मुझे लगा था कि यहां बोलना नहीं पड़ेगा। लेकिन सभा के अध्यक्ष ने मुझसे बोलने की विनति की है, इनकार कर मैं उन्हें निराश करना नहीं चाहता।
आज हम अपने नेता जिन्नासाहब की वर्षगांठ मनाने के लिए यहां इक्ट्ठा हुए हैं। मेरा और उनका व्यवसाय एक ही है। हम दोनों बैरिस्टर हैं। गोलमेज परिषद में हम दोनों ने बराबर में काम किया है। काँग्रेस उनसे जितनी नाराज है उससे अधिक मुझसे नाराज है।
मैं जितना बैरिस्टर जिन्ना को जानता हूं उससे कह सकता हूं कि किसी के बहकावे में न आने वाले मुसलमान नेता हैं। वह अग्रगण्य नेता है। किसी के धन पर वह ललचाएंगे नहीं। उन्हें खरीदना संभव नहीं। उनके निर्लोभी होने के कारण ही उनके बारे में मेरे मन में बेहद आदरभाव है।
इस अवसर पर मुसलमानों की राजनीति के बारे में आपको दो बातें बताना गैर-वाजिब नहीं होगा। हम सब हिंदी है यह बात मुसलमानों को भूलनी नहीं चाहिए। हमारी पैदाइश यहीं की है और हम इसी देश में मरने वाले हैं यह बात पक्की है। अपना देश आजाद रहा तभी हम भी आजाद रहेंगे यह भी सही है। इसीलिए, जाहिर है कि देश की आजादी को संकट में डालने वाली नीति हमें नहीं रखनी चाहिए।
कुछ मुसलमान लोग मानते हैं कि हिंदुस्तान हमारा देश नहीं है बल्कि अफगानिस्तान, अरबस्तान, टर्की आदि हमारे देश हैं। लेकिन मैं आपसे यह पूछता हूं कि हिन्दुस्तान
* जनताः 30 दिसम्बर, 1939