166 26.12.1939 स्वराज आपका और राज हम पर! - बेलगांव - Page 281

260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है कि काँग्रेस के प्रतिज्ञापत्र पर हस्ताक्षर किए बगैर किसी को मंत्री मंडल में नहीं लेना चाहिए तो फिर असम में बिना प्रतिज्ञा के मंत्रियों को क्यों लिया? क्या यह ठगी नहीं है? मेरा झगड़ा सिर्फ इसलिए है क्योंकि मैं चाहता हूं कि हमारे लोग अधिकार में हों। आपका स्वराज और हमारा राज! मैं यह नहीं चाहता।

अस्पृश्यों की शिकायतों की पूछताछ करने के लिए एक कमेटी नियुक्त की गई। उस कमेटी ने सिफारिशें की कि पुलिस में अस्पृश्यों की भर्ती की जाए, आर्थिक प्राप्ति के लिए इस समाज के बारे में अलग से योजना बनाई जाए, फॉरेस्ट की कुछ परती जमीनें उन्हें दी जाएं। आदि लेकिन हमारे मोरारजी देसाई ने सरक्युलर निकाला कि, ‘‘जाति-पांति का ना देख कर फॉरेस्ट की जमीनें उन्हें दी जाएं जो लगान से 20 गुना रकम अदा करें। जिसके पास खाने के लिए अनाज नहीं, रहने के लिए झोपड़ी नहीं वह इतना पैसा लाए कहां से?

माफी जमीन के बारे में तो हद ही हो गई है। महारकी पर अतिरिक्त लगान लगाया गया है। नासिक जिले के एक गांव में तो ढाई हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। महार की के बारे में जब हमने शिकायत की कि हमसे ज्यादा मेहनत करवाई जाती है तो ‘पढ़ने गए नमाज, मस्जिद पड़ी गले’, कहावत के अनुसार हम पर 19 काम दर्ज हुए। इसीलिए हरेगांव (अहमदनगर) में हुई वतनदार महार परिषद में शिकायतें दूर करने के लिए 6 महीनों की नोटिस देने का प्रस्ताव बनाया गया है। उतनी समय-सीमा में अगर वह दूर नहीं हुई तो हम सब हड़ताल पुकारेंगे।

मजदूरों का मसला ही लीजिए। पहले बिना नोटिस के वे हड़ताल कर सकते थे लेकिन इसी काँग्रेस ने कानून बनाया कि हड़ताल करनी हो तो पहले नोटिस देनी होगी। दुनिया में और कहीं ऐसा कानून नहीं है। और इस काले कानून के विरोध में 7 नवम्बर, 1935 को हड़ताल पुकारी गई। तब इसी काँग्रेस ने उन पर गोलियां चलवाकर दो लोगों की जानें लीं। यह मजदूरों पर कानून के जरिए लादी गई गुलामी ही है। उन्होंने आश्वासन दिया, कि 50 प्रतिशत लगान कम किया जाएगा। लेकिन इस मामले में क्या किया गया? शराब पर पाबंदी लगाने की बात पर उन्होंने मुंबई के लोगों पर ढेढ़ करोड़ रुपयों का कर लगाया। शराब पर पाबंदी लगाने के लिए मेरा विरोध है क्योंकि मेरा मानना है कि अमीरों से वसूले जाने वाले कर का इस्तेमाल गरीबों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। शराब पीते हैं इसलिए मुंबई के लोगों पर इन्हें दया आती है लेकिन आज मुंबई के 14000 गांवों में स्कूल नहीं हैं। कोई औरत अगर नंगी दिखाई दे और हमारे पास अगर 2 रु. हों तो उस केस लिए चोली खरीदें या कि साड़ी? पहले वह सोचना होगा कि बदन ढकेगा कैसे? इन्हें मुंबई के लोगों की चिंता है लेकिन लाखों कुलंबों का क्या? इसीलिए कहता हूं कि इनकी राजनीति में किसी का फायदा नहीं। हमारी स्वतंत्र लेबर