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पार्टी न्यायपूर्ण और सत्य का साथ देने वाली है। मैं अपने समाज के लिए मरना चाहता हूं। बिल्ली और चूहा इकट्ठा नहीं रह सकते। एक ही टोकरी के नीचे हम रात में अगर बिल्ली और चूहे को ढक रखेंगे तो सुबह क्या दिखाई देगा? गांधी और कंपनी का अब दीवाला निकलने वाला है उनके पास काफी पैसा है इसलिए वे बार-बार शेवगांव * जाते हैं। कोई प्रस्ताव बनवा कर उसे टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित करो तो काम हो गया। हमारे पास पैसा नहीं है इसलिए हम जोन टिकट के बगैर कहीं जा नहीं सकते। लकडबग्घे के डर से बकरियां अगर भेडि़ए के साथ मिल जाएंगी तो क्या उनका हित होगा? अंग्रेजों के साथ आपकी सच्चाई की लड़ाई हो तो आप कौरव-पांडवों की तरह 105 होकर लड़ें। हम कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे। लेकिन गांधी मानो अंग्रेजों को कोई सीआईडी पुलिस मिली हो जैसा लगता है।
सफेद टोपी देखो तो दिल डर से धक् हो जाता है। लेकिन, उगा हुआ सूरज भी डूब जाता है। इसीलिए संगठन कीजिए।
* यह शायद सेवाग्राम का जिक्र है-संपादक