167 30.12.1939 जनतांत्रिक प्रणाली से हिंदुस्तान को परहेज क्यों? - मुंबई - Page 283

262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* जनतांत्रिक राज्य व्यवस्था से हिंदु समाज को परहेज क्यों?

बैरिस्टर जीन्ना ने मुक्ति दिवस मनाना जब तय किया तो औरों को भी विनती की कि उसमें शामिल हो जाएं। जीन्ना की विनती का सम्मान करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में मुंबई में महंमद अली रोड पर प्रचंड सभा की ** और उसमें भाषण दिया। हिन्दुस्तान के इतिहास में यह सभा अमर होगी। इस महत्वपूर्ण प्रसंग पर डॉक्टर साहब का जो भाषण हुआ वह उतना ही महत्वपूर्ण और चिरस्मरणीय था। उन्होंने अंग्रेजी में भाषण किया। उसका आमूलाग्र अनुवाद देना संभव नहीं है लेकिन सार संक्षेप यहां दिया जा रहा है-डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-

आज के इस अवसर के लिए मैं बैरिस्टर जीन्ना का अभिनंदन करता हूं तथा इस प्रसंग पर अपनी खुशी जाहिर करता हूं। हलांकि एक बात का खेद मुझे अभी भी है कि इस प्रस्ताव में केवल अल्पसंख्यक समाज के बारे में ही प्रधानता से सोचा गया है। केवल एक ही अल्पसंख्यक समुदाय को महत्व देने के बजाय अन्य अल्पसंख्यकों के बारे में भी अगर उसमें सोचा जाता तो और अच्छा होता। सबको मिलकर साथ में प्रस्ताव बनाना चाहिए था। ऐसा नहीं हो पा रहा है यह दुख की बात है। इसके बावजूद सर करीमभॉय इब्राहिम ने काँग्रेस के अन्यायकारी बर्ताव के बारे में प्रस्ताव रख कर रॉयल कमीशन की जो मांग की है उसका मैं पूरी तरह समर्थन करता हूं क्योंकि इस प्रस्ताव में दर्ज की गई बातें सच हैं और मांगे न्यायपूर्ण और सरल हैं।

आप जानते ही हैं कि मि. जीन्ना द्वारा रॉयल कमीशन की मांग किए जाने के बाद से काँग्रेस के नेताओं और पिट्ठु एक अजीब दलील देने लगे हैं। एकदम आसान और सरल लगने वाली उनकी यह दलील असल में कपटनीति से प्रेरित और भरी है। उनकी यह दलील बिल्कुल उस युक्तिवाद की तरह है जैसे मानों कि अपराध की तहकीकात अगर नहीं हुई हो तो अपराध हुआ ही नहीं या फिर कल की तहकीकात अगर नहीं हो तो मानों कत्ल ही नहीं हुआ हो। उनका यही कहना है। 1935 के सुधारित कानून में हर प्रांत के गवर्नर को अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचार का निवारण करने के अधिकार दिए गए हैं। इस विशेष अधिकारों का गवर्नरों को काँग्रेसी राज में एक बार भी कभी इस्तेमाल नहीं करना पड़ा था। इस बारे में उनकी दलील यह है कि, ‘‘मुसलमानों के साथ काँग्रेस की सरकार द्वारा अगर कोई जुल्म होते तो गवर्नर्स अपने अधिकारों का

* जनताः 30 दिसम्बर, 1939

** सभा की तारीख नहीं दी गई है