272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* युद्ध के बाद हिंदुस्तान के सामने बड़ी-बड़ी समस्याएं उपस्थित होंगी
2 जनवरी, 1940 की शाम 4 बजे कराड म्युनिपिलिटी द्वारा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र देना तय हुआ था। इस समारोह में शामिल होने के लिए डॉ. बाबासाहेब सातारा से करीब 3 बजे निकले। सातारा से 13 मील दूर पहुंचते-पहुंचते गाड़ी में खराबी आई और आगे यात्रा करना मुश्किल हो बैठा। कुछ ही समय में मुंबई के परेल इलाके के तम्बाकू के मशहूर व्यापारी हॉमणराव शेटे अपनी निजी मोटर से वहां आ पहुंचे। बड़ी
खुशी के साथ डॉ. बाबासाहेब को कराड तक छोड़ने के लिए वह तैयार हुए। इसी गाड़ी के साथ कराड के पास भयानक दुर्घटना हुई। सौभाग्य से गाड़ी में सवार सभी यात्री मरने से बाल-बाल बचे। किसी को भी गंभीर चोटें नहीं आइंर्। डॉ. अम्बेडकर के सिर में, पैर में और हाथ में चोटें आई थीं। सभी चोटिल यात्रियों को सातारा के बैरिस्टर करंदीकर सरकारी अस्पताल में ले गए। वहां इन सभी की मरहम-पट्टी की गई। वहां थोड़ी देर आराम करने के बाद डॉ. अम्बेडकर करीब 6 बजे के आसपास म्युनिसिपालिटी के मानपत्र समारोह के लिए निकले। म्युनिसिपालिटी का हॉल अंदर और बाहर से सदस्यों और नागरिकों से उमड़ पड़ा था। प्रथमतः स्थानीय स्पृश्य छात्राओं ने स्वागत पद्य गाए। समारोह की शुरूआत हुई। कुछ अन्य पद्यों के गायन के बाद मान्यवर बहुलेकर वकील ने म्युनिसिपालिटी का मानपत्र पढ़कर सुनाया। म्युनिसिपालिटी के अध्यक्ष मान्यवर कदम ने यह मानपत्र डॉ. बाबासाहेब को अर्पण किया। मानपत्र अर्पण किए जाने के बाद डॉक्टर साहेब जवाब देने के लिए उठकर खड़े हुए। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
अध्यक्ष महाराज, सदस्यगण, बहनों और भाइयों,
आपने मुझे जो मानपत्र दिया है उसके लिए मैं आपके प्रति बेहद आभारी हूं। स्थानीय मसलों के बारे में मैंने कुछ कार्य नहीं किया है। मैं कराड में रहता नहीं। मेरा काम राजनीतिक है। ऐसे में मानपत्र अर्पण कर आपने मेरा जो गौरव किया है उससे आपकी उदारता व्यक्त होती है। आज के इस समारोह में मैं उपस्थित रह पाया यह मेरे लिए इष्टापत्ति ही है।
हिन्दुस्तान के आज के हालात में जागरूकता और जिम्मेदारी के अहसास की बहुत जरूरत है। युद्ध के बाद हिन्दुस्तान के सामने बड़ी-बड़ी समस्याएं उपस्थित होने वाली हैं। स्वराज की चाह सभी को है इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन हम सभी को यह
* जनताः 20 जनवरी, 1940