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सावधानी भी बरतनी होगी कि एक का स्वराज दूसरे को गुलामी में धकेलने वाला न हो। अल्पसंख्यकों की मांगों से यही डर व्यक्त होता है। मैं यही कहना चाहूंगा कि इस डर को नष्ट करने के लिए और अपने आगे उपस्थित मसले हल करने के लिए अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के मन में जागरूकता, जागृति और जिम्मेदारी का अहसास पैदा होना चाहिए।
आज हिन्दुस्तान की राजनीति में बड़े विचित्र हालात पैदा हुए हैं। यह विचित्रता ध्यान में आए इसलिए हम पिछली पीढ़ी की राजनीति और इस पीढ़ी की नीति की खुलना करेंगे। पिछली पीढि़ के गोखले, तिलक की राजनीति और आज के गांधी की राजनीति में एक बड़ा फर्क है। पिछली पीढ़ी की राजनीति में विद्वत्ता की जरूरत पड़ती थी। आज की राजनीति में बाति बनाने वालों की जरूरत महसूस की जा रही है। विद्वानों को चुन-चुन कर बाहर किया जा रहा है। आज की राजनीति अंधों की माला के हाथ गई है। यह बेहद अनिष्ट बात हुई है। देश की प्रगति के लिए विभिन्न विचारों, मत-मतांतरों, वाद-विवाद के विभिन्न प्रवाहों की जरूरत होती है। इस प्रकार के विभिन्न विचारों के प्रवाहों से ही हमेशा प्रगति होती रहती है। अंधों की कतार के पीछे अगर देश एक ही राह पर चलता रहा तो वह गड्ढे में गिरने से बचेगा नहीं। वर्तमान राजनीति का केवल एक ही उद्देश्य है और वह है राजनीति में केवल एक ही पंथ का निर्माण करना। जागृति, विभिन्न विचार, सही-गलत की पहचान आदि से इस पंथ को परहेज है। एक ही बात की लकीर पीटते रहने में कोई फायदा नहीं है। आज लोग आंधी को लेकर पागल बने हुए हैं। गांधी का कहा पत्थर की लकीर बनता जा रहा है। गांधी के प्रति पागलपन के साथ-साथ ढोंगीपना भी बहुत बढ़ता जा रहा है। केवल अपनी स्वार्थ साधना के लिए काँग्रेस को चार आने देकर गलत व्यवहार करने वाले कई हरि के लाल आज पैदा होते जा रहे हैं। आज जागृति और जिम्मेदारी नहीं वहां ऐसे मुश्किल हालात तो पैदा होने ही हैं। आपकी कराड म्युनिसिपालिटी में विभिन्न राय रखने वाले तथा विभिन्न पार्टियों के सदस्य हैं। इससे लगता है कि स्थानीय मतदाता सोचने-विचारने वाले हैं। इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। आपके द्वारा दिए गए मानपत्र के लिए एक बार फिर आपके प्रति आभार प्रकट कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूं।
उसके बाद डॉक्टर साहब स्थानीय महारवाड़े के समारोह में शामिल हुए। वहां बड़ा जनसमुदाय दोपहर के चार बजे से ही इंतजार में खड़ा था। वहां बोलते हुए डॉक्टर साहब ने उपस्थित लोगों से कहा कि, आपस में एकता रखिए। अगले चुलावों में स्वतंत्र लेबर पार्टी के उम्मीदवार को ही अपना मत दें। उसके बाद डॉक्टर साहब साथ आए लोगों के साथ सातारा, अपने घर गए।