274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* महारों की माफी जमीन और महारों की बस्ती गुलामी की ही
निशानियां हैं
स्वतंत्र लेबर पार्टी की दूसरी परिषद 3 जनवरी, 1940 की दोपहर में सातारा जिले के मेढे गांव में हुई थी। सभा का अध्यक्ष स्थान डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को देना तय हुआ था।
सभा से पहले बाजे-गाजे के साथ बड़ा जुलूस निकाल कर अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को सभा स्थान पर लाया गया। ईरास्तवन और स्वागत के पद्य आदि गाने के बाद सभा के कामकाज की शुरूआत हुई। स्वागताध्यक्ष मान्यवर सावंत के भाषण के बाद भी जावले ने डॉ. बाबासाहेब से बिनती की कि वे अध्यक्ष पद स्वीकारें। उनकी सूचना का मान्यवर डबाले और मान्यवर रोकडे ने समर्थन किया। तो डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अध्यक्ष स्थान स्वीकारा। अध्यक्ष की सेहत ठीक न होने के कारण उन्होंने पहले स्वतंत्र लेबर पार्टी के नासिक के माननीय भाऊराव गायकवाड से पहले भाषण देने की विनती की। उन्होंने कहा-
कल हुई दुर्घटना में हमारे परमपूज्य नेता डॉ. बाबासाहेब को काफी चोटें आई हैं। ऐसे में अन्य नेताओं की तरह अनिवार्य कारणों की दलील देकर वे सभा में अनुपस्थित रह सकते थे। लेकिन आप सब निराश ना हो इसलिए अपने परिचितों-दोस्तों का कहना न मानते हुए वे आज परिषद में उपस्थित हुए हैं। हम जैसे गरीबों के नेता बनना सुखावह नहीं होता। आप सभी को अहसास होगा कि हमारे लिए उन्हें सिर हथेली पर रख कर संघर्षरत रहना पड़ता है। पिछले हफते में एक के बाद एक दो दुर्घटनाएं हुईं लेकिन बाबासाहेब ने अपने कार्यक्रम में कहीं कोई रुकावट नहीं आने दी। हम सभी को उनके इस बर्ताव से क्या यह पाठ नहीं लेना चाहिए कि राह में चाहे कितने ही संकट क्यों ना आएं, हमें कभी हारकर पीछे नहीं लौटना है।
उसके बाद स्वतंत्र लेबर पार्टी के श्री अनंतराव चित्रे से भाषण करने के लिए कहा गया। मान्यवर चित्रे के भाषण के बाद डॉ. अम्बेडकर का भाषण हुआ। उन्होंने कहा-
बहनों, मेहमानों, भाइयों,
आज मनमाफिक भाषण करना मेरे लिए संभव नहीं है। आज की सभा रंगहीन होने
* जनताः 20 जनवरी, 1940