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* सेना में भर्ती होकर सम्मान के पद हासिल करो
28 जनवरी, 1940 के दिन रत्नागिरी में हाल ही में सेना में भर्ती हुए महार बांधवों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का सेना के ढंग से स्वागत किया।
इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब ने एक छोटा भाषण दिया। उन्होंने सभी स्पृश्य-अस्पृश्य मराठा बंधुओं को सेना में भर्ती होने की सलाह दी। अपने भाषण में उन्होंने कहा-
‘‘आप सैनिक हैं और यह सैनिक का व्यवसाय आपने अपनाया है। जातियों के बीच के मनमुटाव के कारण यह सब बंद पड़ा था। किसी जमाने में मुंबई की सेना में तीन-चौथाई प्रतिशत महारों को चुना जाता था। उस दौरान हमारे पुर्खों ने अंग्रेज सरकार की ओर से कई लड़ाइयों में हिस्सा भी लिया था। जहां पेशवा को हरा कर अंग्रेजों ने अपनी सत्ता की स्थापना की थी वह इतिहास प्रसिद्ध कोरेगाव रणसंग्राम भी हमने ही लड़ा था।
1857 के विद्रोह के बाद अन्य जातियां भी सेना में शामिल हुईं। उनकी जातीय भावनाओं को ठेस ना पहुंचे इसलिए अंग्रेज सरकार ने सेना में महारों की भर्ती रोक दी और इस प्रकार उनकी ईमानदारी के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। अब एक बार फिर हमें सुनहरा मौका मिल रहा है। मुझे उम्मीद है कि इस मौके का फायदा उठाते हुए एक बार आप सेना में अपना पहला सम्मानजनक स्थान हासिल करेंगे। ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता इस बात को ध्यान में रख कर आपको अपने कर्तव्य का पालन करना होगा। मुझे आपसे बस यही कहना है।
* जनताः 10 फरवरी, 1940