98 24.1.1937 पक्ष, लक्ष्य और सिद्धांत न होने वाले त्रिशंकु उम्मीदवारों को ना चुनें - सोलापुर - Page 30

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* पक्ष, लक्ष्य और सिद्धांत न होने वाले त्रिशंकु उम्मीदवारों को ना

चुनें

अखिल भारतीय अस्पृश्यों के इकलौते वंदनीय नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के विलायत से लौटते ही स्वतंत्र लेबर पार्टी के दौरे का कार्यक्रम तय किया गया। तब 24 जनवरी, 1937 का दिन सोलापुर जिले के लिए मिला।खबर मिलते ही सोलापुर के वरिष्ठ सरपंच श्री विश्वनाथबुवा बंदसोडे, महारों की छोटी बस्ती के नेता संभाजीराव बलभंडारे, केशवराव सोवे, शंकराव सातपुते, श्रीपतराव पक्षाले, विठ्ठलराव साबले, मारतीराव बंदसोडे, माठतीराव गायकवाड, जनता के एजेंट रा. ब८ात, रामकृश्ण पुजारी आदि नेताओं ने बाबासाहेब के आने कीखबर पूरे जिले में तुरंत पहुंचाई।खबर मिलते ही तुरंत करसाले, बार्शी, कुर्डुवाडी, टेंभुर्णी, मंदूप, घतसंग आदि हिस्से के नेताओं ने बाबासाहेब के दौरे के कार्यक्रम सभा में आने वाले लोगों केखाने-पीने की तैयारी की। अस्पृश्यों का उद्धारक, अखिल भारतीय दलितों का राजा बाबासाहेब अम्बेडकर के दर्शन के लिए अबालवृद्ध जनता जिले में सर्वत्र उनकी मार्गप्रतीक्षा करती रही। 23 जनवरी की रात सोलापुर में इकट्ठा अस्पृश्य समाज ने बाबासाहेब के स्वागत की तैयारी करने में जाग कर बिताई। कैप्टन यादवराव लोंढे और शहर के विभिन्न अखाड़े के भीमसेना के स्वयंसेवक तड़के 3 बजे से ही सोलापुर स्टेशन पहुंचे। 4 बजे से लोगों का स्टेशन की ओर तांता लगा। 6 बजते-बजते 5-6 हजार लोगों से स्टेशन का परिसर और बाहर की जगह भर गई। 7 बजे के बाद डॉ. बाबासाहेब की गाडी ने स्टेशन में प्रवेश किया। ‘डॉ अम्बेडकर की जय’, ’अम्बेडकर जिंदाबाद’ आदि नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। उसी गूंज में मातंग समाज के केर रामचंद्र जाघव, आपाराव दणाणे, सत्यप्रसारक भीमसेना के कैप्टन यादवराव लोंढे, थोरता महारवाडा पंचों के अखाड़े से नारायण बाबरे, धाकटा महारवाड़ा अम्बेडकर अखाड़े की ओर से संभाजी तलभंडारे, फौरेस्ट दीनबंधु अम्बेडकर अखाड़े की ओर से हरिबाखलीफा, श्री तात्याबा पांडुंग सावंत, चेयरमन, मातारीरस ग्रामपंचायत, निवृत्ति राव माने ओर अकुबा तोंढे और शहर के सभी मोहल्लों की ओर से बाबासाहेब को हार पहनाए गए। फूलों की वर्शा करते हुए आनंद और उत्साह के साथ जयकार करने वालों जनसमुदाय के बीच से स्वयंसेवक बड़ी कोशिशों के साथ मोटर तक ले आए। आगे बाबासाहेब मेसर्स जी आर देशपांडे वकील के बंगले पर रुके और लोग ’अम्बेडकर जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए बड़े महारवाडे में लगाए गए शामियाने में चले गए। चायपान के बाद ठीक 4 बजे बाबासाहेब सभामंडप पहुंचे। उनके

* जनताः 6 और 13 फरवरी, 1937