10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आते ही जिंदाबाद का गर्जन होने लगा, तालियों की गड़गड़ाहट हुई और उनके मंच पर स्थानापन्न होते ही शांति फैली। मातंग समाज की ओर से केरू रामचंद्र जाधव ने उन्हें फूलमाला पहनाई। अपने भाषण में श्री जाधव बोले, ‘‘अखिल भारतीय अस्पृश्य समाज को शिक्षा, समानता, सम्मान और रोटी मिले इसलिए अपने प्राणों की भी परवाह किए बगैर निर्भयता, समता और व्यापकता के साथ बाबासाहेब द्वारा जो आंदोलन चलाया जा रहा है वह निश्चित तौर पर हमारा उद्धार करेगा। बाबासाहेब ही हमारे नेता हैं, वही हमारे धम ार्धिकारी हैं और वही हमारे परमपूज्य भगवान हैं। मातंग समाज उनका एकनिष्ठ अनुयायी हैं और मुम्बई में हुई इलाका मातंग परिषद ने यह बात साबित की है।’’ उनके भाषण के बाद बाबासाहेब बोलने के लिए उठे। उनके उठते ही जिंदाबाद के नारे लगे, तालियों की गड़गड़ाहाट हुई और फिर एकदम शांति छाई। डॉ. बाबासाहेब ने अपने भाषण में कहा,
भाइयों और बहनों,
आज हम यहां यह तय करने के लिए इकट्ठा हुए हैं कि मुंबई लेजिस्लेटिव एजेंसी के आगामी चुनाव में हम किसे अपना मत देकर चुनाव जिताएं। इस देश में कई राजा हुए। अंग्रेजों को यहां आए करीब 150 साल हुए। अंग्रेजों के 150 सालों के शासन में पिछले 60 सालों से ये कौंसिलें कार्यरत हैं और उनके जरिए जनता के प्रतिनिधि हमारे लोगों की शिकायतें सरकार के सामने रख रहे हैं। लेकिन जिन्हें अस्पृश्य माना गया है उन आठ करोड़ प्रजा की ओर से उनका पक्ष रखने वाला कोई प्रतिनिधि काउंसिल में हो यह बात आज तक कभी नहीं हुई थी। वही बात आज आपकी कोशिशों से हुई है। आगामी अप्रैल, 1937 से शुरू हो रहे विधि मंडल के लिए सोलापुर जिले के अपने लोगों को एक प्रतिनिधि भेजने का अधिकार मिला है। इस बार की कौंसिल हमारे बचाव का साधन होगी। वहीं हमारे सुख-दुखों का न्याय होगा। वहीं महारों के वतन के बारे में, बंजर जमीनें मिलने के बारे में, शिक्षा पाने के लिए वजीफे हासिल करने के लिए, अस्पृश्यता के कारण आई दीनता से। छुटकारा पाने के लिए, सरकारी नौकरी में योग्य अनुपात में प्रवेश पाने के लिए और भी सैंकडों बातों के लिए विधि मंडल के द्वारा हम संघर्ष कर सकते हैं। जाहिर है कि वहां आपका प्रतिनिधि केवल सम्मान पाने के लिए नहीं जाएगा। वह हमारे समाज के हित के लिए जाएगा यह बात ध्यान में रखें। रोजमर्रा के व्यवहार में हम घर बनाते वक्त ईपट-पत्थर आदि के कामों के लिए कडिए को ओर लकड़ी के काम के लिए बढ़ई को काम देते हैं। कहीं रेलवे का पुल बनाना हो तो इंजीनियर की जरूरत पड़ती है। स्कूल में पढ़ाने वाले मास्टर वह काम नहीं कर सकते। लेकिन आपके यहां से उद्धव शिवशरण मास्टर ने मुझेखत लिखा कि इस पद पर उन्हें नियुक्त किया जाएं। अंग्रेजी न जानने वाले इस मास्टर के बारे में मुझे अजीब लगा। दो महीनों तक मैं सोचता रहा। फिर श्री जिवाप्पा ऐदाले के नाम की घोषणा की। इतना सब होने तक मुझ तक श्री मागाढे का नाम नहीं पहुंचा था। बाद में पहुंचा। लेकिन इसके पीछे कांग्रेस का हाथ होने का सबूत मेरे पास है। भाइयों, कांग्रेस को स्वराज चाहिए। हमें भी स्वराज चाहिए। लेकिन उसे पाने के