173 4.2.1940 देश हित के लिए निजी हित त्यागने को मैं तैयार हूं - मझगांव (मुंबई) - Page 301

280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पूछिए। वे सब एक स्वर में यही बताएंगे कि मडकेबुवा ही हमारे सच्चे कामगार नेता हैं। चेंंबूर के कूड़ेदान में काम करने वाले मजदूरों की और अन्य म्युनिसिपल कामगारों की तनख्वाह उन्होंने तुरंत लाखों रुपयों से बढ़ा कर दे दी। ऐसे नेता हमारी पार्टी में हैं। लेकिन जो नापसंद होते हैं उनका नमक अलोना होता है। इसका कोई कुछ कर नहीं सकते।

कुछ लोग मुझे मानते हैं मैं उसी में संतुष्ट हूं। सिद्धांतों को त्याग कर मुझे काँग्रेस का नेता, मजदूरों का नेता, किसानों का नेता बनने का कोई शौक नहीं। *

काँग्रेस द्वारा हमारे जिन नेताओं को तोड़ा गया था वे मा. बी. राजा, मा. देवरुखकर, और मा. राजभोज अब फिर लौट आए हैं। यह खुशी की बात है। अन्य भटके लोग भी लौट आएंगे ही इसका मुझे पूरा यकीन है। इसमें से जो शहद के लालच में बरगलाए गए युवक हैं उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि किसके आंदोलन से आपको नौकरियां मिलती हैं? इस बारे में जरा सोचिए और अपना पागलपन त्याग दें। 1926 में पहली बार सचिवालय में चपरासी रखने को लेकर गवर्नर से मेरी झड़प हुई मुझे यह वाक्य अच्छी तरह याद है। आज स्वतंत्र लेबर पार्टी द्वारा हमारे समाज के लिए छांव वाली जगह दिला दी है। अपना संगठन बनवाकर और आंदोलन को निरंतर जारी रख कर इस छांव को विस्तार देना ना भूलें। आखिर में बस इतना ही आपसे कहना चाहता हूं। छांव देने वाले पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाना आत्मघात करने जैसा ही है, है ना?

* उपलब्ध अंक की अगली बाईस पंक्तियां अस्पृष्ट हैं।