284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
काम को संगठन और अनुशासन के बल पर कैसे सफल बनाया जा सकता है यह इस आंदोलन के जरिए जाना जा सकता है। इस मुकदम में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर आदि प्रतिवादियों की तरफ से मि. गुप्ते और मि. मोडक वकील द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई सराहनीय और अभिनंदनीय है।
डॉ. अम्बेडकर का महाड में आगमन
19 मार्च, 1940 को कुलाबा जिले के महाड में अस्पृश्यों का 14वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए डॉ. बाबासाहेब 18 तारीख को धरमतट की राह से मुंबई से महाड जाने के लिए निकले। उनके साथ स्वतंत्र लेबर पार्टी के उनके सहयोगी श्री दौलतराव जाधव, श्री मडकेबुवा, श्री भातनकर, श्री पाटणे, श्री सवादकर और श्री सहस्त्रबुद्धे आदि लोग भी थे।
रेवस बंदरगाह पर रा. नारायणराव थले और रा. कुंडलिक कमल पाटील आदि चरी शंतकरी संघ और अलीबाग के स्वतंत्र लेबर पार्टी के आगरी नेताओं ने उन्हें फूलमालाएं अपर्ण कीं।
डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में धरमतर में बंडू पांडुरंग पाटील (आगरी) और गोवाल चांगू जाधव (अस्पृश्य) ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें फूलमालाएं अपर्ण कीं। यहां डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में बंदरगाह पर नारायण नागोजी पाटील, सौ. पाटील, अनंत राव चित्रे, श्री कोवले और श्री सुररण्बा टिपणीस आदि कुलाबा और रत्नागिरी जिले के किसान उपस्थित थे।
इसके बाद गडप गांव के किसानों की ओर से आगरी नेता श्री दामोदर खंडू पाटील ने उनका स्वागत कर उन्हें फूलमालाएं अपर्ण कीं।
कोलाड में रावसाहेब बारटक्के, श्री किंजले, पुणे म्युनिसिपालिटी के पूर्व नगराध्यक्ष श्री शेखा खोत और श्री जोसेफ खोत ने उनका स्वागत किया।
इंदापुर में श्री बापूसाहब देशमुख ने डॉ. अम्बेडकर तथा बाकी सभी लोगों का जोरदार स्वागत करते हुए उन्हें नाश्ता कराया। इस स्वागत समारोह में कु. भागीबाई तुकाराम गायकवाड़ इस अस्पृश्य युवती ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया था। आगे नाणगांव में श्री अनंत गंगाराम खुले और श्री शंकरराव खुले भाइयों ने डॉ. बाबासाहेब का स्वागत करते हुए उन्हें पुष्पहार अपर्ण किया।
यहां से मेहमान लोणेरे गांव पहुंचे जहां किसान नेता श्री पांडुरंग बुवा चोरवे (कुणबी) ने डॉ. साहब का स्वागत करते हुए उन्हें फूलमालाएं अपर्ण कीं। ख्2,
- जनताः 23 मार्च, 1940