174 19.3.1940 राजनीतिक आजादी पाते ही जनता का कल्याण होगा यह भ्रम है - महाड़ - Page 306

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‘‘महाड में मना अस्पृश्य दिवस - झंडा वंदन

सोमवार 19 मार्च, 1940 को कुलाबा जिले के महा़ गांव में 14वां अस्पृश्य स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर सुबह महाड़ के मशहूर चवदार तालाब पर झंड़े की वंदना का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इस समारोह के लिए स्वतंत्र लेबर पार्टी के करीब 200 स्वयंसेवक काम कर रहे थे। डॉ. बाबासाहेब के नेतृत्व में बाहर से परिषद के लिए आए लोगों के साथ 200 स्वयंसेवी जुलूस के साथ सुबह 11 बजे चवदार तालाब के पास इक्ट्ठा हुए। श्री मचंडे ने बिगुल बजा कर समारोह शुरू होने का इशारा उपस्थितों को दिया। उसके बाद स्वतंत्र लेबर पार्टी के कुलाबा जिले के नामचीन नेता श्री सुरबा टिप्पणीस ने सभा में उपस्थित लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से समारोह संपन्न कराने की प्रार्थना की।

उसके बाद खानदेश के पृथक मजदूर पार्टी के नेता रा. दौलतराव जाधव ने 1927 में चवदार तालाब के लिए हुए संघर्ष की जानकारी देकर पृथक मजदूर पक्ष का झंडा कैसे विजयी बना इस बारे में संक्षेप में जानकारी दी।

फिर कुछ समय तक बिगुल वादन का कार्यक्रम हुआ। उसके बाद चंद्रकांत ने झंडे को झटका और पृथक मजदूर पक्ष का झंडा डॉ. बाबासाहेब के हाथों फहराया गया और उसका सामुदायिक वंदन किया गया।

झंडा वंदन के बाद विधायक जाधव ने झंडे को हाजिर-नाजिर मानकर की जाने वाली प्रतिज्ञा उपस्थितियों का पढ़ कर सुनाई।

हमारा आंदोलन निरंतर फैल रहा है

प्रतिज्ञाविधि के बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भाषण देने के लिए उठ कर खड़े रहे। उन्होंने कहा,

बहनों और भाइयों,

अब हम स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में से पहले कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। दोपहर में आयोजित इस कार्यक्रम के दूसरे हस्से के जुलूस में शामिल होंगे। उसके बाद शाम को हमारी सभा होने वाली है। जुलूस के दौरान और सभा में आपको शांति का पालन करना होगा। पिछले पंद्रह सालों में हमें कोलाबा जिले में, खास कर महाड में स्पृश्यों में से कई सहयोगी मिले और हमारा आंदोलन निरंतर फैलता रहा। इसके बावजूद इस बात का कोई भरोसा नहीं कि हमारे कार्यक्रम में कोई कुछ गलत नहीं कर सकता। पुराने समय की अपनी यादें अभी ताजा हैं। इसीलिए जुलूस और सभा