286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में शांति कायम रखने की आपको पूरी-पूरी कोशिश करनी होगी। समारोह को बिखरे देने के लिए एकाध-दूसरा इंसान भी काफी होता है। किसी ने कोई गाली बकी, एकाध पत्थर उछाला तो शांति भंग होने का खतरा रहता है। ऐसा कुछ हो तब भी शांति बनाए रखनी चाहिए, यह इशारा मैं आपको दे रहा हूं। अगर कोई समारोह में खलल डाले तो उस ओर ध्यान न दें। मैं आपसे कहता हूं कि उस ओर साफ नजरंदाज कर समारोह को सफल बनाएं। स्वतंत्रता दिवस के बारे में मेरा भाषण शाम की सभा में होगा इसलिए उस बारे में यहां कुछ बताने की जरूरत नहीं है।
डॉ. बाबासाहेब ने भाषण के बाद स्वयंसेवक तालाब का चक्कर लगाकर घर चले गए। झंडा वंदन समारोह के अवसर पर लाऊड स्पीकर लगाए जाने के कारण समारोह स्थान से मील भर की दूरी तक कार्यक्रम सुनाई दे रहा था। ख्3,
‘‘अस्पृश्य स्वतंत्रता दिवस की विराट सभा’’
दोपहर करीब 3 बजे सभा के अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को जुलूस निकाल कर सभा स्थान पर लाया गया। महाड के इतिहास में ये जुलूस और सभा अद्वितीय थी।
खास कर इस सभा में हिस्सा लेने के लिए पुणे के श्री गोपीनाथराव पोतनीस के साथ करीब 1000 मावले (युवक) आए थे।
जुलूस वीरेश्वर रोड़ से निकला। वहां से पोस्ट ऑफिस, खडा प्रांतिक रास्ता, सालवाड़ा अलावा, सरेकर आली, चवदार तालाब का दक्षिणी हिस्सा, डोंगरे पुल, पेठ और सुकाती गली के रास्ते जुलूस सभा स्थान पहुंचा। जुलूस की लंबाई करीब डेढ़ मील की थी।
जुलूस में ‘स्वतंत्र लेबर पार्टी की जय हो, ‘अम्बेडकर जिंदाबाद’, ‘महात्मा फुले की जय’, ‘महात्मा आगरकर की जय’, ‘किसानों की जय हो’, ‘श्रमिकों की जय हो’, ‘जमींदारी खत्म करो’, ‘साहूकारी खत्म करो’, ‘पूंजीवाद खत्म करो’, ‘साम्राज्यवाद खत्म करो’, ‘भिक्षुवाद खत्म करो’, ‘जातिभेदों को नष्ट करो’, ‘अस्पृश्यता खत्म करो’, ‘समता की जय हो’, ‘मालिकवाद खत्म हो’, ‘अस्पृश्यों की आजादी की जय हो’ आदि नारों से वातावरण गूंज उठा। जुलूस चल ही रहा था। रास्ते में श्री भानुदास कांबले और श्री भाई वंडके ने जुनी पेठ में बाबासाहेब को फुलमालाएं अर्पण कीं। सरेकर गली में श्री भिकोबा मालुसरे और श्री यशंवतराव टिपणीस ने उनका सम्मान किया। सातवाड़ा में साती मास्टर ने फुलमाला पहनाई। चवदार तालाब के पास श्री दगंडोबा सालुंके और श्री दत्तोबा देशपांड़े ने उनका सम्मान किया। नवी पेठ के महाड़ मुंबई मोटर युनियन की ओर से साली मास्टर ने डॉ. बाबासाहेब को फूलमालाएं पहनाईं।
- जनताः 23 मार्च, 1940