174 19.3.1940 राजनीतिक आजादी पाते ही जनता का कल्याण होगा यह भ्रम है - महाड़ - Page 308

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इस प्रकार यह विशाल जुलूस शाम करीब 5 बजे सभा-स्थल पहुंचा। फिर सभा का कामकाज शुरू हुआ।

इस सभा में बाहर से महाड़ शहर में आए श्री गोपीनाथराव पोतनीस, राजाराम भाऊ भोले, भाऊसाहब गडकरी, विधायक सावंत, श्री अधिकारी वकील, विधायक घाडगे और शंकरराव खुले आदि लोग उपस्थित थे।

स्थानीय लोगों में रा. ब. बर्णिक, श्री अण्णा साहब भिलारे, यशवंत वीरकर, कैप्टन जगताप, पी. बी. गांधी, हिरालाल शेठ मारवाड़ी, विष्णुपंत चांदे, डॉ. चितले, डॉ. खेडकर, बुटाला वकील, शंकरशेट डोलस, महादेव शेठ बनारसे, दत्तोपंत देशपांडे, हरिभाऊ बनारसें, भानुदास कांबले, नारायण राव मांगडे और सावंत वकील आदि लोग उपस्थित थे।

सभा की शुरूआत कु. इंदु गुप्ते और श्री विमल गुपते द्वारा गाए गए स्वागत गीत से हुई। उसके बाद सुश्री वृंदा चित्रे ने आभार प्रदर्शक पद्य गाया। फिर सभा के स्वागताध्यक्ष श्री सुरबा टिपणीस ने अपने भाषण में नियोजित अध्यक्ष से अध्यक्षस्थान ग्रहण करने की विनती की।

श्री सुरण्बा के प्रस्ताव का श्री नारायण राव पाटील ने समर्थन किया।

पनवेल के विधायक भातणकर ने श्री पाटील के भाषण का समर्थन किया और तालियों की गड़गड़ाहट और अम्बेडकर जिंदाबाद के नारों के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अध्यक्ष स्थान स्वीकारा।

उसके बाद अध्यक्ष के आदेशानुसार श्री चिंतामणराव देशपांडे ने सभा के लिए आए सांसद भास्करराव जाधव, श्री केशराव ठाकरे, दामुअण्णा पोतनीस, गोविंद राव बरधाकर, देशराव नाईक, कारखानीस, श्री राजभोज, काकासाहब लिमये आदि स्पृश्यास्पृश्य नेताओं के संदेश पढ़ कर सुनाए। ख्4,

शुरूआती हैंडबिल के अनुसार 19 मार्च, 1940 को अस्पृश्यों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले महाड क्रांति दिवस को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लेकर उस दिन महाड में स्पृश्य, अस्पृश्य, मुसलमान समुदायों के पंद्रह से बीस हजार लोग इक्ट्ठा हुए थे। बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस जनसमुदाय का मार्गदर्शन किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा-

‘‘हैंड बिल में आपने सभा का उद्देश्य पढ़ा है। आज महाड में सुख का शांति का, एकता का वातावरण है। लेकिन 14 साल पहले इसी समय महाड में हालात कितने मुश्किल

  1. जनताः 19 मार्च, 1940