98 24.1.1937 पक्ष, लक्ष्य और सिद्धांत न होने वाले त्रिशंकु उम्मीदवारों को ना चुनें - सोलापुर - Page 32

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लिए कांग्रेस ने जो कानून तोड़ने का रास्ता अपनाया है वह हमें मंजूर नहीं। कानून तोड़ने से हालांकि स्वराज की नींव पड़ चुकी है। कांग्रेस वाले आपको बताएंगे कि हम सब की एकजुट होकर अंग्रेजों को इस देश से भगा देंगे और आजादी पाएंगे। लेकिन, सोचने की बात यह भी है कि जिनमेंखटमल मारने की ताकत नहीं है वे सभी तरह से शक्तिमान अंग्रेज सरकार को कैसे भगाएंगे- या मान लीजिए, कल अंग्रेज सरकार इंग्लैंड चली गई तो हमें धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक अवनति के गड्ढे में धकेल कर सड़ाने वाले जमींदार, मालगुजार कहीं विदेश तो नहीं जाएंगे? और, कांग्रेस तो सेठ, साहूकार, जमींदार, पूंजीपती लोगों की संस्था है। इसलिए आप ऐसे लोगों की बड़ी-बड़ी बातों में ना आइए।

भाइयो, अपने वोटों की कीमत नोट बराबर न समझें। अपनी जान या उससे ज्यादा अपने वोट की कीमत है यह बात ना भूलें। किसी अजीब उम्मीदवार को वोट देंगे तो किसी निर्दयी के हाथ में छुरा थमाने जैसा होगा। श्री जिवाप्पा ऐदाले मेरे पक्ष के उम्मी­ दवार हैं। उनका अपना लक्ष्य है, अपने सिद्धांत हैं। उनकी और आपके भावी हित की मेरी जिम्मेदारी है। इसलिए श्री जिवाप्प ऐदाले को ही अपने तीनों मत देकर चुनाव में जिता दीजिए। बाकी उम्मीदवार मेरे दुशमन नहीं हैं। लेकिन जिनका कोई पक्ष नहीं, लक्ष्य नहीं, सिद्धांत नहीं ऐसे त्रिशंकु उम्मीदवारों की जिम्मेदारी मैं नहीं लूंगा। आज तक हो सकता है कभी किसी ने आपसे अपने जिले का, तहसील का नाते-रिश्तों के बारे में गर्व महसूस करने की सलाह दी होगी। ना दी हो तो आगे कोई दे भी सकते हैं। लेकिन इस प्रकार गर्व महसूस करने लगे तो आखिर आपको अपने गांव का घर के बारे में भी गर्व महसूस करना होगा। और इस प्रकार अगर हर घर में उम्मीदवारखड़े रहेंगे तो आपके भविष्य के कल्याण का सत्यानाश होगा इसके बारे में सोचिए।

आखिर आपसे इतना ही कहना चाहूंगा कि इस शहर के मजदूरों की ओर से आपको एक मत देने का अधिकार है। उस जगह के लिए मजदूरों की ओर से श्री रघुनाथराव बखले, उम्मीदवार बने हैं। आज तक उनके द्वारा कौंसिल में की गई गरीबों, मजदूरों किसानों, अस्पृश्यों की सेवा मुझे मंजूर है। सोलापुर के मजदूर उन्हीं को अपना मत दें। सेठ, साहूकार, मिल-मालिकों के पिस्तुओं को अपना वोट देकर आपका कल्याण नहीं होगा। इसीलिए श्री बखले को ही अपना वोट दें।

इतना कह कर बाबासाहेब ने अपना भाषण पूरा किया। तुल्जापुर के कदम ब्रदर्स द्वारा तथा अन्य कईयों द्वारा फूलमालाएं पहनाई जाने के बाद जयकार की ध्वनि के साथ सभा बरर्खास्त हुई। उसके बाद बाबासाहेब मंदूप रवाना हुए।

मंदूप की सभा

सोलापुर का कार्यक्रम पूरा करर बाबासाहेब आएंगे यह सोच कर मंदूप परगना और मंगतवेढा संस्थान से इक्ट्ठा दो हजार से अधिक जनसमुदाय बाजे-गाजे की पूरी तैयारी