174 19.3.1940 राजनीतिक आजादी पाते ही जनता का कल्याण होगा यह भ्रम है - महाड़ - Page 311

290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चवदार तालाब का संघर्ष सामाजिक समता का संघर्ष था। इस संघर्ष के दूरगामी परिणाम हुए हैं। उन पर नजर डालने से इस लड़ाई का व्यापक स्वरूप समझ में आता है। यह संघर्ष शुरू हुआ तभी से हमने मृत मांस खाना छोड़ दिया और गांव में टुकड़े मांग कर पेट भरने की दुष्ट रूढि़ का पालन करना छोड़ दिया। हमारे इस आंदोलन की शुरूआत में लोग हमसे पूछते कि इन रूढि़यों का पालन करने वाले हमारे पुरखे क्या मूर्ख थे? उनके इस सवाल से उस वक्त की लोगों की मानसिकता का पता चलता है। आज उनकी इस मानसिकता में फर्क आया है। यह फर्क चवदार तालाब के लिए छेड़े संघर्ष से ही पैदा हुआ है। हम पर कई देवी-देवताओं का असर था। खंडोबा और मुरलियों (मुरली-देवदासी) की प्रथा को बहुत महत्व प्राप्त था। अब हमारे बीच से पुराने भूतों-पिशाचों और भगवान-भगवतियों को हमन े विदा कर दिया है। आज महार समाज की कायिक, मानसिक और आत्मिक त्रिशुद्धि हुई है। आज यह स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए हम हर तरह से लायक हुए हैं। ‘मन आजाद तो इंसान आजाद’ यह बात ध्यान में रखें। चवदार तालाब के संघर्ष से ही पृथक मजदूर पक्ष का जन्म हुआ है। यह पक्ष इस लड़ाई का राजनीतिक फल है। चवदार तालाब की लड़ाई से ही हममें राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक जागृति आई है। इस बात को कोई ना भूलें।

इस लड़ाई का स्पृश्यों पर भी असर हुआ है। इसी लड़ाई के कारण महाराष्ट्र में महाडकर लोगों की गिनती पहले होने लगी है। यह जागृति और उन्नति इसी संघर्ष की देन है। चौदह साल पहले फूटे सिरों ने इस जागृति और प्रगति को जन्म दिया है। यहां आए कुणबी और मराठा भाइयों को अब मैं दो शब्द बताने वाला हूं। वे ध्यान देकर सुनें-

महार समाज में अब प्रशंसनीय जागृति हुई है। महाराष्ट्र के संदर्भ में ही अगर बोलना हो तो आज यह कहने का समय आया है कि महाराष्ट्र में केवल महार और ब्राह्मण की राजनीति जानते हैं। इस मामले में कुणबी ओर मराठा समाज में जागृति नहीं है।

आपको सोचना होगा कि ऐसी स्थिति आज अगर है तो क्यों है? आपमें गर्व तो है कि आप महारों से श्रेष्ठ हैं। लेकिन मैं समझ नहीं पाता कि महारों से बड़ा होने में क्या बड़प्पन है? समाज के निचले स्तर के लोगों से तनकर पेश आने में कैसा पुरुषार्थ है?

कुलाबा जिले में सात मामलतदार हैं। उनमें कुणबी-मराठा कितने हैं? आपको इस बात के बारे में सोचना होगा। अधिकारी वर्ग में आपके कितने लोग हैं? क्या आप में से कोई प्रांत का अधिकारी है? आपमें से क्या कोई कलक्टर है? आपको इन महत्वपूर्ण मसलों के बारे में सोचना होगा। आपका सामाजिक प्रतिशत 70 से 80 है। केवल झाड़ूवाले और चौकीदारों की ओर देख कर ही आप सीना फुलाते रहेंगे क्या?

महार समाज अब ताकतवर बना है। अब वह डुबेगा नहीं। तुम्हारे पैरों के नीचे भी