292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* मेरी राय है कि व्यवहार कुशलता और चारित्रिक संपन्नता ये दो
महाराष्ट्रियों के गुण हैं
अस्पृश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 19 मार्च, 1940 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर महाड आए थे। इस कार्यक्रम में महाड म्युनिसिपालिटी ने उन्हें मानपत्र अपर्ण किया। इस अवसर पर महाड म्युनिसिपालिटी के सदस्य और महाड के प्रमुख नागरिक उपस्थित थे। मा. खोडके ने मानपत्र पढ़ा। उसमें लिखा था-
डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर,
एमए. पीएचडी, (कोलंबिया)_ डीएससी (लंदन)_ बारएट लॉ_ एमएलए_ जेपी, मुंबई के चरणों में-
विद्वत्मान्य भारतभूषण डॉक्टर साहब,
ठीक तेरह वर्ष पूर्व दिनांक 19 मार्च, 1927 को हमारे महाड शहर में अस्पृश्य जनता ने आपके नेतृत्व में चवदार तालाब का पानी भर कर अपने नागरिक समानता के जन्मसिद्ध अधिकार पर अमल किया। उस ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति को जागृत रखने के उद्देश्य से 19 मार्च का दिन ‘अस्पृश्य स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उसी समारोह में आज आप यहां आए हैं। इस ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण प्रसंग पर महाड शहर के नागरिकों की ओर से हम यानी महाड म्युनिसिपालिटी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्य आपका हार्दिक स्वागत करते हैं।
छात्रावास में आपने कई तरह के संकट झेल कर ज्ञानार्जन किया। आपकी असमान्य बुद्धिमत्ता, ज्ञानलालसा देखकर स्व. श्रीमंत सर सयाजीराव महाराज गायकवाड़ ने आपको विदेश जाकर ज्ञान प्राप्त करने का मौका और साधन उपलब्ध करा दिए। दर्शन, राजनीति, विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, कानून आदि गहन विषयों में आपने स्वदेशी और विदेशी विश्वविद्यालय में विद्या प्रापत की। स्वार्थबुद्धि से आप अगर चाहते तो बड़े अधिकार वाली सरकारी नौकरी पाना चाहते तो अपनी विद्वत्ता के बल पर बड़ी आसानी से ऐसी नौकरी पा लेते। लेकिन सरकारी नौकरी के मोह में पड़े बगैर अपनी स्वतंत्र वृत्ति के लिए अनुकूल बैरिस्टरी का व्यवसाय अपनाया और श्रेष्ठ कीर्ति अर्जित की।
आपने अपने प्रभावशाली नेतृत्व में इस देश के सात करोड़ अस्पृश्य जनता का स्वाभिमान जागृत किया। उसमें नवचेतनता और स्फूर्ति निर्माण की। मानवता के अपने
* जनताः 23 मार्च, और 30 मार्च, 1940