177 28.7.1940 निश्चय और निष्ठा के साथ चुपचाप कार्य करने वाले कार्यकर्त्ता चाहिए - परेल (मुंबई) - Page 318

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* निश्चय और निष्ठा के साथ चुपचाप काम करने वाले कार्यकर्त्ता

चाहिए

रविवार 28 जुलाई, 1940 को सुबह 10 बजे परेल, मुंबई के दामोदर ठाकरसी हॉल में ठाणे अस्पृश्य विद्यार्थी वसतिगृह सहायक मंडल की ओर से अस्पृश्य समाज की बड़ी सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। अध्यक्ष स्थान पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर थे।

पहले श्री पी.एल लोखंडे ने प्रि. एम. वी. दोंदे बी.ए. और श्री एस. जी. केनी जे. पी. के अभिनंदन का प्रस्ताव रखा। उसके बाद श्री लोखंडे, श्री ए. बी. केनी, श्री सी. एन. मोहिते और वि. का. उपशाम के भाषण हुए। उनके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ जिसमें उन्होंने कहा-

आज के इस खास अवसर पर भाषण करने की जरूरत नहीं है। 1926 में ठाणे बोर्डिंग शुरू किया गया था। पिछले 14-15 सालों से समाज पर किसी भी तरह का बोझ डाले बगैर हमने उसे चलाया है। इस बोर्डिंग के संदर्भ में मुंबई सरकार के साथ कुछ शर्तों तय हुई थीं। उसमें हर बच्चे के लिए हर माह 10 रुपया देना उन्होंने तय किया था। लेकिन जब काँग्रेस सत्ता में आई तो मुझसे बातचीत किए बिना ही उन्होंने हर बच्चे के लिए हर माह 10 रु. की तय रकम को घटा कर केवल 4 रु. ही मंजूर किए। हर बच्चे का खर्चा 4 रुपयों में समेट कर बोर्डिंग चलाना बेहद कठिन काम है।

ठाणे बोर्डिंग की सारी जिम्मेदारी अब आप पर हैं। हिंदुओं के दर पर जाना हमारे स्वाभिमान के विरुद्ध है। सारा बोझ अपने सिर पर उठा कर बोर्डिंग को लगातार चलाना होगा। हमेशा के लिए बोर्डिंग चलाने के लिए आज मिली रकम नाकाफी है। मदद इतनी दीजिए कि कार्यकर्त्ताओं को काम करने में उत्साह महसूस हो। मदद कैसे करनी है यह आप तय करें। लेकिन मुझे यहां पढ़े-लिखे लोग - अध्यापक, क्लर्क आदि ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। वे हर माह बोर्डिंग की मदद करने में सक्षम हैं। म्युनिसिपल यूनियन के कार्यकर्ता यूनियन के सदस्यों से सालाना कुछ मदद दिला दें। शादी या तत्सम समारोहों के अवसर पर बोर्डिंग के लिए दान दें। समाज में 100 से अधिक संस्थाएं हैं। वे हर साल के आखिर में 20-15 रुपए दें तो उन्हें कोई हर्ज नहीं होगा। हालांकि रुपयों की

* जनताः 3 अगस्त, 1940