177 28.7.1940 निश्चय और निष्ठा के साथ चुपचाप कार्य करने वाले कार्यकर्त्ता चाहिए - परेल (मुंबई) - Page 319

298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कमी के कारण बोर्डिंग बंद नहीं होगा ऐसा मुझे लगता है। हमारे समाज में मन को एकाग्र कर काम करने वाला कोई व्यक्ति पिछले बीस वर्षों में मुझे दिखाई नहीं दिया। कौंसिल अथवा म्युनिसिपालिटी की एक-एक जगह के लिए सौ-सौ अर्जियां तैयार रहती हैं। लेकिन एक रास्ते पर चलते हुए एक ही काम एक लक्ष्य रख कर करने वाला कोई आदमी पिछले 20 सालों में मुझे दिखाई नहीं दिया है। शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक अड़चनों के मसले महत्वपूर्ण हैं। इन कामों के लिए नाम पाने की अभिलाषा न रखने वाले लोग चाहिए। जिसे देखिए आज नाम कमाने के पीछे है। इसलिए मन मुताबिक काम नहीं होते। अस्थायी कामों से महत्वपूर्ण मसले हल नहीं होते। उसके लिए दिन-रात मेहनत करनी होगी। ब्राह्मण समाज ने हमारे साथ अन्याय किया है। उन्होंने हम पर जुल्म ढाए हैं यह सच है। लेकिन उनके काम करने का तरीका इतना अच्छा है कि हासिल की हुई सत्ता को वे अपने वश में करके रख सकते हैं। किसी तरह का ताम-झाम न पालते हुए बुनियाद और नीति के अनुसार काम करने वाले लक्ष्य पर नजर गड़ाने पर काम करते रहने वाले कार्यकर्त्ता उनमें पैदा होते हैं। हमारे कार्यकर्त्ताओं ने अगर निश्चय के साथ, निष्ठा के साथ तथा चुपचाप अगर काम करने लगें तो हमारे आंदोलन की जड़ें फैलने में देर नहीं लगेगी।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के भाषण के दौरान लगातार लोग चंदा देते रहे। सभा में कुल रु. 182 जमा हुए। एक साल में ‘म्युनिसिपल कामगार संघ’ के सदस्यों से 200 सेर चावल दिलाने का वचन श्री जी. एम. जाधव ने दिया।

‘जनता’ पत्रिका के प्रबंधक श्री के. वी. सवादकर ने ‘जनता’ पत्रिका और भारतभूषण छापाखाने की मदद करने वाले व्यक्ति को अंतःकरण से धन्यवाद दिया। श्री रामकृष्ण गंगाराम बनाम बाबूराव भातणकर, एम.एल.ए. ‘ठाणे वसतिगृह सहायक मंडल’ के अध्यक्ष ने ठाणे बोर्डिंग की मदद करने वालों के प्रति मन से आभार प्रकट किया। जन-समूह से उन्होंने विनती कि की डॉ. बाबासाहेब के भाषण के बारे में सोच कर हर कोई उनकी आज्ञा के अनुसार बर्ताव करे। सबके प्रति आभार प्रकट करने के साथ सभा बर्खास्त हुई।