98 24.1.1937 पक्ष, लक्ष्य और सिद्धांत न होने वाले त्रिशंकु उम्मीदवारों को ना चुनें - सोलापुर - Page 33

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के साथ आतुरता से गांव से बाहरखड़ा था। 10 बजे के आसपास बाबासाहेब की गाड़ी आई और ‘अम्बेडकर जिंदाबाद’ का हुलड़ मचा। जुलूस के साथ जब बाबासाहेब मंडप के पास आए तब सुहागिनों ने उनके पैरों के पास घड़ों से पानी उंडेला। कपूर जलाकर कर नारियल तोड़े और पंचारतियों आरती उतारते हुए कहा, ‘भगवान बुरी नजर से बचाए, बाबासाहेब सफल हों।’ उसके बाद सभा का कामकाज शुरू हुआ। पहले मंदूप परगणा के देरामेहेत्रे गंगापा रणखांबे ने स्वागत का भाषण दिया। बाबासाहेब ने थोड़े बहुत फर्क के साथ सोलापुर की सभा में दिए भाषण जैसा ही भाषण दिया। श्री ऐदाले को ही वोट देने के लिए कहा। उसके बाद भीमप्पा रणखांबे ने श्रीमंत देशमुख, श्री पांढरे और समाजनों को धन्यवाद दिया। श्री बाबासाहेब के जयकार के साथ सभा समाप्त हुई। उसके बाद सोलापुर की ओर लौटे। वहां धाकौटा महारवाडा अम्बेडकर तालीम की ओर से उन्हें पान-सुपारी दी गई। उसे स्वीकार कर डॉ. अम्बेडकर आगे वलसंग की ओर रवाना हुए।

वलसंग की सभा

वलसंग की राह में कुंभारीकर योगीबुवा और अन्य लोगों की ओर से पंचायत की इमारत के सामनेखास कर बनाए गए मंडप में डॉ. बाबासाहेब को पान-सुपारी दी और फूलमलाएं अर्पण कीं। 11.25 बजे के करीब बाबासाहेब वलसंग पहुंचे। वहां भी वलसंग कुम्हारी, सलगर, मंगतूर आदि हिस्सों से तथा अक्कलकोट रियासत से तीन हजार से अधिक जनसमुदाय वहां इकट्ठा हुआ था। बाद में वहां के प्रबंधक श्री ओंकारप्पा वतसंगकर के स्वागत के भाषण के बाद बाबासाहेब ने थोड़े फर्क के साथ सोलापुर का भाषण ही यहां भी दोहराया और ऐदाले को ही अपने वोट देने के लिए कहा। उसके बाद लोगों ने उनसे विनति की कि वे सोलापुर जिले के लोकल बोर्ड द्वारा बना कर दिए गए कुएं से पानी निकालें। चांदी के लोटे में बंधी रस्सीखींच कर डॉ. अम्बेडकर ने कुएं से पानी निकाला। लोगों ने प्रसाद के तौर पर पानी मांगा तो बाबासाहेब ने ‘दक्षिणा निकालो’ कहा तब सब ओर हंसी और ठहाके फैले। आखिर बाबासाहेब को लोगों को पानी का प्रसाद बांटना पड़ा। लोगों ने उस कुएं का नाम अम्बेडकर बावड़ी रख। फिर बाबासाहेब सोत्लापुर के लिए रवाना हुए।

सोत्लापुर में श्री देशपांडे वकील के बंगले पर रवाना हुआ और बाबासाहेब बार्शी के लिए निकले। रास्ते में वैराग, पानगांव आदि जगहों पर फूलमालाएं स्वीकारीं। तीन बजे के आसपास बाबासाहेब बार्शी के श्री भगवंत मिल के पास पहुंचे।

बार्शी में हुई सभा

सरमेलकर, रा नामदेवराव वासकर, माणकेश्वर, कासारवाडीकर के बैंड के साथ यहां 8-9 हजार लोग यहां इकट्ठा हुए थे। वहां से जुलूस निकाल कर बाबासाहेब प­ ोस्ट ऑफिस पुलिस चौकी, काजी मस्जीद, जैन मंदिर, सब्जी मंडी के रास्ते म्युनिसिपल