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* दूदृष्टि और बचत इन दो गुणों को भावी पीढी संजोए
कोकणस्थ महार को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी खार, मुंबई की ओर से श्री खंगदेव नारायण मोहिते, श्री गणपत विट्ठल कासारे और श्रीमती मुक्ताबाई दगडू सांताबेकर इन तीनों ने मिल कर खार में नए, सुंदर घर बनाए। इसी आनंदोत्सव के उपलक्ष्य में उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को अपने घर में रविवार, दिनांक 22 सितम्बर, 1940 को 4 बजे बढि़या टी-पार्टी दी। पहले मोहिते मास्टरजी ने उन्हें अपने घर में फूलमाला अर्पण की उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ सबका ग्रुप फोटो लिया गया। फोटो के बाद सबको बिए़या गार्डन पार्टी दी गई। नए तीन घर और कॉलोनी की ओर से डॉ. बाबासाहेब को फूलमाला अर्पण किए जाने के बाद मोहिते मास्टर ने डॉ. बाबासाहेब तथा अन्य उपस्थित मेहमानों के प्रति आभार प्रकट किया। मेहमानों की ओर से सुरुबा टिपणीस ने आयोजकों को धन्यवाद अर्पण किया। आखिर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोले। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
आपके घर देख कर मुझे बड़ी खुशी हो रही है। आपने जो साहस किया है उस पर मुझे गर्व है। मैं उसके लिएआपका अभिनंदन करता हूं। आपका यह सुख आपके पुत्र-पौत्रों तक टिका रहे ऐसी कोशिश की जानी चाहिए। ठीक समय पर घर की किश्तें देकर गृहस्थी को सुखमय करें। उसके बाद उन्होंने कैंप दापोली में रहने वाले अवकाशप्राप्त सुबेदार के वैभव और जीवनक्रम के बारे में बताया। साथ ही उनके बच्चों की दुर्दशा का भी वर्णन किया। पिता सुबेदार और बेटा झाडुवाला यह स्थिति सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। यह भी उन्होंने बताया। वे बोले, इसलिए आप सभी दूरदृष्टि से और बचत करते हुए अपना वैभव बनाए रखें, भावी पीढ़ी भी उसे बरकरार रखे। जिनके लिए संभव हो वे अपने लिए ऐसे घर जरूर बनाएं और अपनी गृहस्थी को सुखपूर्ण करें। अपने पड़ोस में झोंपड़ों में जीवन बिताने वाले अपने गरीब रिश्तेदारों से मिलजुल कर रहें। उनके लिए अच्छे घर बनवाने के लिए मैं सरकार और बांद्रा म्युनिसिपालिटी में कोशिशें कर रहा हूं।
आखिर आयोजकों के प्रति आभार प्रविष्ट करते हुए उन्होंने अपना भाषण पूरा किया। इस अवसर पर प्रो. वी. जी. राव, ‘बै. एस. एन. माने, मे. कमलाकांत चित्रे, भाई चित्रे, सुरेनद्रनाथ टिपणीस शलिकोल, आर. जी. भाताणकर, के. वी. सवादकर, संभाजी गायकवाड़, बी. बी. उनबरकर आदि महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे।
* जनताः 28 सितम्बर, 1940