181 1.11.1940 ...तो गांवों के अन्याय पीड़ित लोगों की मदद की जा सकती है - दादर (मुंबई) - Page 325

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह जगह हमने पसंद की। जगह बहुत बड़ी थी जिसे टुकड़ा कर हमें देने के लिए मालिक तैयार नहीं था। लेकिन कुछ मित्रों के जरिए हमने इस जगह को तोड़कर कुल जमीन का एक टुकड़ा हमने खरीदा।

20 सालों से हमारा सामाजिक कार्य चल रहा है। सभा, समारोह आदि विभिनन कामों के लिए जगह की जरूरत पड़ती तब हमें यहां-वहां, औरों के पास जाना पड़ता। इस जगह हम जो इमारत खड़ी करेंगे उससे यह कमी पूरी हो जाएगी। यह जगह हम सबके लिए बहुत सुविधाजनक है। इस जगह का क्षेत्रफल 1100 वर्ग गज है। ट्राम पास से गुजरती है। जी. आई. पी., बी.बी. एंड सी.आई. के स्टेशन पास हैं। कीमत के हिसाब से कह सकते हैं कि हमें यह जगह रियायत में मिली है। कहीं जमीन की कीमत आजकल 22 रुपए वर्ग गज तो कहीं 25, 27, 30 रुपए वर्ग गज तक है। हमें यह जमीन 15 रुपए प्रति वर्ग गज में मिली है। (तालियां)

खुशी की बात यह भी है कि इस जगह के मालिक की ऐसी कोई शर्त नहीं है कि आज के आज जगह की पूरी रकम चुकता कीजिए और जमीन का कब्जा लीजिए। अगर वे ऐसी शर्त रखते तो एक साथ इतनी बड़ी 15-16 हजार रुपयों की रकम अदा करना हमारे लिए थोड़ा कठिन होता। हमें यह रकम बारह सालों तक किश्तों में अदा करनी है।

यह जगह हमने 999 सालों के करार पर ली है। कहा जा सकता है कि व्यावहारिक नजरिए से यह करार यानी यावच्चंद्रदिवाकरौ मालिकियत वाला करार है।

इस जगह तीन मंजिला इमारत बनाने का हमारा इरादा है। पहली मंजिल पर आधे हिस्से में ‘भारत भूषण छापखाना’ और आधे हिस्से में म्युनिसिपल युनियन के तथा अन्य दफतर होंगे और कुछ रिहायशी कमरे। दूसरी मंजिल पर किराएदारों के लिए कमरे बनाने हैं। अंदाजन करीब 16 कमरे बनेंगे। उनसे सालाना करीब 3500 रुपयों का किराया मिलेगा।

तीसरी मंजिल पर 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट लंबाई वाला हॉल बनाना है।

हॉल का किराया नियमित रूप से नहीं आएगा। इसके बावजूद अंदाजन करीब 400 से 500 रुपयों तक की सालाना आमदनी होनी चाहिए।

इस प्रकार अनुमानतः सालाना 4000 रुपयों की आमदनी होने की उम्मीद है। उसमें से म्युनिसिपालिटी का टैक्स, ब्याज आदि अदा करने के बाद अंदाजन करीब 2500 रुपए बचेंगे। इससे पता चल जाएगा कि इस जगह पर ऐसी इमारत बनाना हमारे लिए फायदेमंद ही साबित होगा।