182 23.11.1940 सार्वजनिक कामों के लिए एका जरूरी - वरली (मुंबई) - Page 329

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उससे फायदा उठाएं। इमारत फंड के लिए हर पुरुष और महिला को, 18 साल से बड़े हर व्यक्ति को भले वह बेकार ही क्यों न हो दो-दो रुपए देने हैं।

आप जिला, तहसील और देश के स्तर पर संघ की स्थापना कर काम करते हैं। मुझे यह काम का तरीका बिल्कुल पसंद नहीं है। मैं कोई भेदाभेद नहीं मानता। हममें अगर भेदभाव पैदा हुआ तो हिंदू समाज उसका फायदा उठा कर हमारे आंदोलन को खत्म करेगा। नेता बनने का मुझे कोई लालच नहीं है। लेकिन आप नेता क्यों चाहते हैं? इस बारे में सोचिए। हम नेता इसलिए चाहते हैं ताकि वह दुश्मनों से मुकाबला कर सके। हमारे कल्याण के लिए मेहनत करने वाला, हमारे हितों की राह में अंड़ंगा बनने वाले गांधी, नेहरू, बल्लभभाई पटेल से भिड़ने वाला नेता हमें चाहिए। अगर ऐसा कोई मिले तो मैं भी उसे नेता मानने के लिए तैयार हूं। (तालियां) किसी भी पत्थर पर सिंदूर पोतने से वह हनुमान नहीं बनता। चॉल के आंगन में तलवार चलाने वाला लेकिन समर में डर के मारे भाग खड़ा होने वाला योद्धा किस काम का?

पांडवों ने जिंदगी भर श्रीकृष्ण की सेवा की। आखिर स्वर्ग ले जाने के बारे में श्रीकृष्ण से विनती करने लगे। तब श्रीकृष्ण ने कहा, ‘‘मैं खुद ओढया जगन्नाथ की तरफ बहता चला जा रहा हूं।’’ ऐसा ही हाल हमारे आंदोलन से जो नहीं जुड़े हैं उनका ना हो तो भी गनीमत है। हमारे कार्य में कार्यकर्त्ताओं की कमी है। इस कमी को अध्यापक वर्ग पूरा करे। इमारत के लिए ली गई जगह कम है ऐसा हमारे लोग कर रहे हैं। उनका कहना है, बड़ी जगह लीजिए, हम पैसा इक्ट्ठा करके देंगे। मैं भी बड़ी जगह लेना चाहता हूं। इस काम के लिए दो-ढाई लाख रुपयों का खर्चा आएगा। इसके लिए मैंने कुछ योजनाएं बनाई हैं। जिन्हें मासिक 30 रु. या उस से अधिक तनख्वाह मिलेगी वे अगर अपनी एक महीने की तनख्वाह दें तो उनका नाम इमारत में बोर्ड पर लिखा जाएगा।

मैं गांव-गांव से मदद मांगने वाला हूं। लेकिन गांव में एक इंसान से मांगने के बजाय किसी गांव से प्राप्त रकम के तौर पर उस गांव का नाम लिखा जाएगा। सो मित्रो, अगर अपना भविष्य उज्ज्वल रखना हो, अपने समाज का कल्याण करना हो तो आपको यह काम अपना कर्तव्य मान कर पूरा करेंगे डॉ. बाबासाहेब का भाषण पूरा हुआ सो उनकी जयकार ध्वनि से वातावरण गूंज उठा।

आखिर में डॉ. बाबासाहेब को फूलमालाएं पहनाई गईं। सबको धन्यवाद देने के बाद सभा का कामकाज पूरा हुआ। वहां की व्यायामशाला डॉ. बाबासाहेब ने देखी। आनंदा लालू मायाणीकर, शं. ना. खैरमोडे, ठाकले मास्तर, माने मास्तर, कांबले आदि लोगों ने सभा का बढि़या प्रबंधन किया था। इसी सभा में दूसरे गांव से आए श्री सुकडया सखाराम जाधव ने डॉ. बाबासाहेब से मार्गदर्शन प्राप्त कर इमारत फंड में एक रुपया दिया।