183 24.11.1940 अभी कोंपलें निकली हैं, यह संकेत है कि पफल आएंगे - चिखलपाडा (मुंबई) - Page 330

309

183

* अभी कोंपलें निकली हैं, यह संकेत है कि कल फल आएंगे

श्री सोमवंशीय समस्त मंडल, चिखलपाडा, फोरास रोड, मुंबई की ओर से रविवार, दिनांक 24 नवम्बर, 1940 की शाम को दलितों के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में इमारत फंड में रकम अर्पण करने का समारोह बड़े ताम-झाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बैरिस्टर माने, मोहिते मास्टर, श्री मडकेबुवा, उपशाम मास्टर, सचिव इमारत फंड, श्री धयालकर, जी. ओ. सी. समता सैनिक दल मुंबई, श्री मिंढे पाटील आदि महत्वपूर्ण हस्तियां उपस्थित थीं। करीब 4-5 हजार से अधिक लोग उपस्थित थे। इक्ट्ठा जनसमुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ तथा डॉ. बाबासाहेब की जय’, ‘अम्बेडकर कौन है, दलितों का राजा है’ आदि नारों के साथ उनका स्वागत किया।

श्री एन. एम. सालवे ने सभा की शुरूआत की। आमंत्रण का सम्मान कर डॉ. बाबा­ साहेब अम्बेडकर अपना अनमोल समय खर्च कर सभा में उपस्थित हुए इसके लिए उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के प्रति आभार प्रकट किया। इसी प्रकार के सभा के नियुक्त अध्यक्ष भी थे इसलिए उनसे अध्यक्ष पद स्वीकारने की विनती की गई। श्री बी. एस. गायकवाड़ द्वारा समर्थन किए जाने के बाद डॉ. बाबासाहेब अध्यक्ष स्थान पर विराजमान हुए।

इमारत फंड के सचिव श्री एस. ए उपशाम मास्टर ने बहुत बोधप्रद भाषण दिया।

उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ कर खड़े हुए। तब तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गूंज उठा। डॉ. बाबासाहेब ने कहा-

प्रिय बहनों और भाइयों,

आज की सभा में इमारत फंड के लिए इक्ट्ठा की गई रकम स्वीकार कर यहां के लोगों को आशीर्वाद देने के अलावा और कुछ बोलने का मेरा मन नहीं है। मुझे जो कुछ कहना या वह सब मैंने कल ही बरली की सभा में कह दिया है। सो यहां आप मुझसे लंबे भाषण की उम्मीद न करें। मेरे पहले जो वक्ता बोले उन्होंने भी आपको सभी आवश्यक जानकारी दे दी है। इस काम की अभी-अभी शुरूआत हुई है। इसकी जितनी अच्छी हो सके उतनी अच्छी छवि बनाना आवश्यक है। मैं रात के भाषण का सारांश आपको सुनाने वाला हूं। साथ ही, जो लोग इमारत फंड के बारे में नहीं जानते उन्हें इमारत फंड के बारे में जानकारी भी देनी होगी। यहां इक्ट्ठा हर व्यक्ति सोच कर देखे, पिछले बीस वर्षों में हमने काफी उन्नति की है। यह उन्नति हमेशा इसी प्रकार कैसे बनी रहेगी इस बारे में सोचना भी जरूरी है। पिछले 20 सालों में अपने समाज की उन्नति

* जनताः 30 नवम्बर, 1940