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दवाखाने के पासखड़े किए भव्य सभास्थल जाकर पहुंचे।
सबसे पहले बार्शी के युवा, पढ़े-लिखे महार नेता श्री मनोहर दादा बोकेफोडे ने सबके स्वागत का भाषण दिया। उसके बाद बाबासाहेब से कुछ थोड़े बदलावों के साथ सोलापुर के भाषण जैसा ही भाषण यहां भी दिया। लोगों से कहा कि वे श्री ऐदाले को ही अपना वोट दें। उसके बाद विभिन्न संस्थाओं की ओर से फूलमालाएं पहनाए जाने के बाद सभा विसर्जित हुई। फिर बाबासाहेब कुर्डुवाडी की ओर रवाना हुए।
कुर्डुवाडी की सभा
यहां जिला बोर्ड के सदस्य श्री शंकरराव रिकिबे, कोंडीराम कांबले, निंगापा कुमार ऐदाले, सांगोतकर, बंदसोडे,खंडेराव मिÐी, भाऊसाहेब कांबले, केसकर आदि लोगों ने ‘श्री हीरालाल थिएटर’ को सजाकर सभी तरह की तैयारियां कर रखी थीं। श्री बालकृष्ण ऐदाले का भाषण पूरा होने के बाद बाबासाहेब ने सोलापुर की ही तरह आधे घंटे तक भाषण दिया। श्री ऐदाले को ही अपना मत देने की बात जब लोगों ने कबूली तब लोगों द्वारा अर्पण किए फूलमालाएं और गुलदस्ते स्वीकार कर बाबासाहेब टेंभुर्णी की ओर रवाना हुए।
टेंभुर्णी की सभा
यहां के महार और मातंग समाज के लोगों ने अपनी पंचायत की इमारत के सामने सुन्दर मंडप बनाए थे और पान-सुपारी की व्यवस्था की थी। यहां हर जगह 10 मिनट रुक कर बाबासाहेब ने इलेक्शन से संबंधित पहली तरह का भाषण संक्षेप में किया और पान-सुपारी और फूलमाला गुलदस्तों का स्वीकार कर वह करमाला के लिए आगे चले।
करमाला की सभा
करमाले के नेता श्रीखंडेराव कांबले और उनके सहयोगी बंधुओं द्वारा बनाए गए भव्य और सुन्दर मंडप में पांच हजार लोगों का समुदाय बड़ी आतुरता से बाबासाहेब की मार्गप्रतीक्षा कर रहा था। बाबासाहेब के आते ही ‘अम्बेडकर जिंदाबाद, अम्बेडकर की जय’ आदि नारों से आकाश गूंज उठा। पहले वहां के सुशिक्षित महार नेता श्री जनार्दनराव कांबले का बाबासाहेब का गुणगान करनेवाला बढि़या भाषण हुआ। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के कहे अनुसार श्री ऐदाले को अपना वोट देने के लिए यहां के जनसमुदाय के राजी होने की बात बताई। उसके बाद सोलापुर की तरह ही बाबासाहेब ने करीब आधे घंटे तक भाषण किया। उसके बाद नगर के उम्मीदवार श्री प्रभाकरराव रोहम ने उनका समर्थन करते हुए भाषण दिया। उनके बाद वहां के ईसाई मिशन के उपदेशक का श्री ऐदाले के समर्थन में भाषण हुआ। स्थानीय नेता श्रीखंडेराव कांबले ने बाबासाहेब और सभा में उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त कर बताया कि श्री ऐदाले को चुनाव में जिताने के लिए यहां के लोग पहले से ही तैयार हैं। अंत में फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण करने बाबासाहेब की जयकार ध्वनि की गूंज में सभा विसर्जित हुई। श्री रोहम और नगर