312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* ...ऐसा भेदभाव अधःपत्तन की ओर ले जाएगा
शनिवार 7 दिसम्बर, 1940 की रात साढ़े आठ बचे मुंबई के चंदनवाड़ी में इमारत फंड की विशाल सार्वजनिक सभा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में हुई थी। सभा के लिए तीन-चार हजार का जनसमुदाय जुटा था। उपस्थित जनसमुदाय ने डॉ. बाबासाहेब के आगमन पर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। ‘अम्बेडकर कौन है, दलितों का राजा है’, ‘अम्बेडकर जिंदाबाद, थोड़े दिनों में भीम राज’ आदि नारे भी लगाए गए। इस अवसर पर श्री मोहिते मास्टर, वि. का. उपशाम मास्टर, वडवलकर, मिंढे पाटील, लोखंडे, गायकवाड़, आमदार, भाई चित्रे, वरालेसाहब आदि लोग उपस्थित थे। सभा में बेहतरीन प्रबंध रखा गया था।
सभा की शुरूआत श्री ड. तु. जाधव मास्टर ने की। सभा के नियोजित अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर से उन्होंने अध्यक्षपद स्वीकारने की विनती की। श्री खैर ने उनकी बात का समर्थन किया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अध्यक्ष स्थान स्वीकार किया।
पहले श्री सी. एन. मोहिते मास्टर ने डॉ. बाबासाहेब द्वारा शुरू किए गए इमारत फंड के बारे में और सभी व्यस्क महिला और पुरुषों को इमारत फंड में चंदा देने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री वडलकर और उपशाम मास्टर ने भी समयोचित भाषण किए।
फिर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए खड़े हो गए। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
आज यहां सभा का आयोजन कर आपने मुझे आमंत्रित किया इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। वैसे मैं कभी किसी को धन्यवाद नहीं देता। फिर आपको ही मैं क्यों धन्यवाद दे रहा हूं? क्योंकि पिछले दस-बारह सालों से आपने सामाजिक कार्य में हिस्सा नहीं लिया। मुझे शक होने लगा था कि यहां के लोग सो तो नहीं गए हैं? वे करते क्या हैं? आदि बातों का मुझे बिल्कुल पता नहीं था। अब आपने यह सभा बुला कर समाज कार्य के बारे में अपनी जिज्ञासा प्रकट की इसलिए मेरा आपको धन्यवाद देना योग्य ही है। महाड़ के आंदोलन के बाद से कुछ लोग कोकणी लोगों के बारे में बोलने
* जनताः 14 दिसम्बर, 1940