316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* बच्चों को पढ़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना
शनिवार, दिनांक 15 फरवरी, 1941 की रात 10 बजे फलण रोड मुंबई की म्युनिसिपल चॉल में प्रि. दोंदे साहब की अध्यक्षता में एक जंगी सार्वजनिक सभा हुई। सभा में काफी लोग उपस्थित थे। अस्पृश्यों के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सभा में उपस्थित होंगे सोचकर फोर्ट तथा अन्य जगहों पर रहने वाले लोगों के समूह 8 बजे से ही सभा स्थान आ रहे थे। डॉ. बाबासाहेब अन्य कार्यकर्ताओं के साथ ठीक 10 बजे सभा स्थान पहुंचे उस वक्त उनके जयकार की ध्वनि से वातावरण गूंज उठा था।
कुछ देर बाद सभा की शुरूआत हुई। सभा के अध्यक्ष प्रिं. दोंदे ने अध्यक्ष स्थान स्वीकारने के बाद भाषण दिया। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को 230 रु. की थैली अर्पण की। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब भाषण करने के लिए उठ खड़े हुए। अपने भाषण में वह बोले-
सभाधिपत्ति, बहनों और भाइयों,
कई सालों के बाद आज मैं यहां आया हूं। बचपन में मैं जब एलफिन्स्टन हाईस्कूल जाता था तब यहीं मेरे कुछ रिश्तेदार रहा करते थे। उन्होंने मुझे खाने पर बुलाया था इसलिए मैं आया था। उसके बाद आज मैं यहां आया हूं।
समाज में बदलाव की जो हवा चल पड़ी है वह यहां तक पहुंची होगी ऐसा मुझे नहीं लगा था। क्योंकि इस जगह कोई अच्छी सभा होने की बात मैंने कभी सुनी नहीं थी। हालांकि आज यहां के लोगों ने इस सभा का आयोजन किया इस बात का मुझे संतोष है।
अन्य सभी कामों को परे हटा कर मैंने इमारत का यह काम हाथ में लिया है। इस इमारत की हम लोगों की कितनी जरूरत है यह शायद आप लोग नहीं जानते। आप में से हर कोई यह जानता हो कि अपने आंदोलन की शुरूआत महाड़ के सत्यग्रह से हुई। आप कुलाबा और रत्नागिरी जिले के रहने वाले हैं इसलिए आपको शायद महाड़ के बारे में पता हो। महाड़ के सत्याग्रह का मेरे मन पर बहुत असर हुआ है। इस सत्याग्रह से अगर मैंने कुछ सीखा हो तो यही सीखा है कि अगर अपनी उन्नति का काम करने लगे तो स्पृश्य लोग हमें बेहद परेशान करते हैं। महाड़ में हमारे लोग जब खाना खाने बैठे
* जनताः 22 फरवरी, 1941