318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऐसी इच्छा आपको पालनी होगी। अन्य जिलों की तुलना में कुलाबा, रत्नागिरी जिलों में पढ़ाई के मामले में हमारे लोग काफी पिछड़े हुए हैं। बहुत कम लोग मैट्रिक तक पढ़े हैं। इसीलिए अपने बच्चों को पढ़ाने में आपको कोई कोर कसर नहीं छोड़नी है।
दूसरी बात यह है कि आपकी कपड़ों का इस्तेमाल करने के बारे में आदतें बुरी हैं। आप काम के लिए जाते समय, घूमने जाते हुए या शादी के लिए जाते हुए एक ही कपड़ा पहनते हैं। यह बहुत बुरा है। काम पर जाते हुए, घूमने जाते हुए या शादी-ब्याह में जाते हुए अच्छे कपड़े पहनें। दोनों वक्त खाना नहीं मिलता तब भी कोई बात नहीं, कपड़े हमेशा अच्छे पहनिए। क्योंकि आज दुनिया में कपड़ों की इज्जत होती है।
तीसरी बात यह कि मुंबई में म्युनिसिपल कामगार युनियन अब बहुत फैली हुई है। पहले एक बार भड़के बुआ ने इस यूनियन को उखाड़ने की कोशिश की थी लेकिन उस वक्त उन्हें उसमें सफलता मिली थी। लेकिन अब उनकी कोशिशें सफल हो रही है। इसीलिए मैं आपका और मडकेबाबा का अभिनंदन करता हूं। संगठन का कितना महत्व है इसका एक ताजा उदाहरण मैं आपको बताता हूं। म्युनिसिपालिटी कामगार युनियन की ओर से ड्रेनेज विभाग में काम करने वालों को काम की तुलना में बेहद कम तनख्वाह मिलती थी। उन्हें अधिक तनख्वाह मिले इसलिए म्युनिसिपल कमीश्नर को सूचना देकर हड़ताल का नोटिस दिया। हमारी हड़ताल तोड़ने की बहुत कोशिश की गई। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। आखिर म्युनिसिपल कमीश्नर ने उनकी मांगें मान लीं और ड्रेनेज विभाग के कामगारों की तनख्वाह बढ़ाई गई। इस मुंबई में अन्य लोगों ने जो हड़तालें की उनमें सफलता नहीं मिली। फिर सही हड़ताल को सफलता कैसे मिली? इसकी कोई और वजह नहीं थी बल्कि उनका संगठन ही एक मात्र वजह थी।
आप जो काम करते हैं उनके लिए स्पृश्य लोगों को हर माह अगर 100 रुपए भी दिए जाएं तो वे नहीं करेंगे। आपने अगर हड़ताल की तो मुंबई के लोगों के सामने छटपटा कर मर जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होगा। इसलिए अगर आप एका रखेंगे तो मुंबई में रहने वाले लोगों की नाक आपकी मुट्ठी में रहेगी।
आज तक आपको महंगाई भत्ता दिलाने के लिए म्युनिसिपालिटी में एक प्रस्ताव रखा गया है। इसीलिए आप म्युनिसिपल कामगार यूनियन के सदस्य बन कर यूनियन की लड़ाई में सहायता कीजिए। इतना कहकर मैं अपनी जगह बैठ जाता हूं।