320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधायक ऐदाले ने बहुत सारी सरकारी परती जमीन दिला दी है। उनकी दीनता जहां तक संभव हो। कम करने के लिए और कुछ गांवों के अस्पृश्यों पर हुए अन्याय के निवारण के लिए उन्होंने काफी कोशिशें की हैं। उसमें उन्हें काफी सफलता भी मिली है। आगे भी कुछ सुधार होने थे लेकिन राजकाज का बोझ बीच में ही सड़क पर छोड़ कर काँग्रेस के बौखलाए बैल भाग खड़े हुए। ये बैल गांधी से खौफ खाते हैं। गांधी कोई गप्प उड़ाते हैं और उनके भाट दिमाग पर परदा डाले, ढोल पीटना शुरू करते हैं। काँग्रेस का हाल आज कुछ ऐसा ही है। 1885 में हिंदू लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए ही काँग्रेस का जन्म हुआ था। शुरूआती पच्चीस सालों में उसे कोई ज्यादा जानता नहीं था। मुंबई-पुणे के कोई नेता व्यापारी उठे, कहीं इक्ट्ठा हों, कुछ प्रस्ताव पारित करें उतना ही उसका स्वरूप था। लेकिन पिछले 20 सालों से उसके नाम का ढोल जोर से पीटा जाने लगा है। अंग्रेज लोग मि. चेंबरलेन को प्रमुख देते हैं साम्राज्य चलाने की सभी जिम्मेदारी उन्हें सौंपते हैं। लेकिन उनके सार्वजनिक बर्ताव के कारण अपने को गुलामी झेलनी पड़ेगी यह शक होते ही उन्हें प्रधानमंत्री के पद से नीचे खींच लेते हैं, अपदस्थ कर देते हैं! काँग्रेस का हाल ऐसा नहीं है। उसके पास व्यवहारज्ञान या चतुराई नहीं है। 1940 को वह लगभग 1911 का साल मान रही है। लेकिन अब उसमें कोई दम नहीं रहा। काँग्रेस की गंगा से अलग निकल कर हिंदू सभा की यमुना अपने अलग प्रवाह से बहती जा रही है। मुसलमान मुस्लिम लीग के झंडे के नीचे हैं। मुस्लिम लीग का प्रवाह बिल्कुल अलग राह से बहता जा रहा है। मुसलमानों का दबदबा बढ़ा है। अंग्रेज सरकार को झुकाने की ताकत काँग्रेस या हिंदू सभा में नहीं है। यह केवल मुस्लिम लीग ही कर सकता है। हिन्दुस्तान के वाइसराय लॉर्ड लीनलिथगो ने विधिमंडल के पुनर्गठन की योजना प्रस्तुत की। तब अहंकार और उद्दामता का प्रदर्शन करते हुए काँग्रेस ने अपनी भूमिका स्पष्ट कि पहले सत्ता काँग्रेस के हवाले करें, फिर काँग्रेस तय करेगी कि मुस्लिम लीग, अस्पृश्य या अल्पसंख्यकों को उसमें लेना है या नहीं, अगर लिया तो किस अनुपात में लेना है, किस व्यक्ति को लेना है आदि। यह काँग्रेस का दुराग्रह था। अगर किसी व्यक्ति को अहंकार हो तो वह चिंता की वजह नहीं, अपने कर्मों का फल वह अकेला भुगतेगा। लेकिन जब किसी व्यक्ति के अहंकार का असर उस व्यक्ति को प्राप्त पद के कारण बाधक होता है तब सभी के उस बारे में सोचने की जरूरत होती है। राष्ट्र के हित के लिए झूठी, दंभपूर्ण और अहंकारी मानसिकता पर रोक लगानी होगी और राष्ट्रकार्य को सही दिशा में आगे ले जाना चाहिए। लेकिन गांधी के बिफरे बैल उसे रास्ते में ही छोड़ कर हिंदी राजनीति का पूरा बंटाधार कर दिया है। गांधी के नियमों के अनुसार चलने वाले हरिजन सेवक संघ का भी वही हाल है। अस्पृश्यों को साक्षर बनाने के लिए वे कहीं कोई छोटा-सा स्कूल
खोलेंगे, इस्तेमाल के लिए नया कुआं खोद देंगे। लेकिन ये काम सरकार भी यथाशक्ति कर ही रही है। हरिजन सेवक संघ वालों से मैं विनती करता हूं कि भाइयों, अस्पृश्यों