322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ही तरफ रहे। क्योंकि उन्होंने कौरवों का अनाज खाया था। आप अपनी काबिलियत के हिसाब से मदद कीजिए। मुझे आत्मविश्वास है कि मैं इमारत बनवा लूंगा।
आज मैं निजाम सरकार के राज्य भाइयों के बारे में बोलूंगा। वैसे देखा जाए तो खालिसा मुल्कों में हो या निजाम के राज्य के दायरे में हो- दोनों जगह महारों का एक-सा हाल है। हिंदुस्तान में जो 500-600 रियासतें हैं उनमें सबसे बेहतर स्थिति में, पहले दर्जे पर निजाम का राज्य है। उसकी तुलना में बड़ोदा रियासत बहुत-छोटी है। लेकिन इस रियासत में अस्पृश्यों के पढ़ने-लिखने का प्रबंध किया हुआ है। मैसूर रियासत में अस्पृश्यों को जमीनें मिलीं। सुरती के लगान में छूट भी मिली। उन संस्थाओं में अस्पृश्यों के हितों का ध्यान रखा हुआ दिखाई देता है। लेकिन हैदराबाद रियासत में अभी महारों की रोजी-रोटी का मसला ठीक से हल हुआ दिखाई नहीं देता। वहां अस्पृश्यों की प्राथमिक शिक्षा का कोई प्रबंध किया हुआ दिखाई नहीं देता। लाखों एकड़ सरकारी जमीन खाली पड़ी है और अस्पृश्य लोग भूख से लड़ रहे हैं? रियासत की आर्थिक स्थिति बेहतर है, फिर समझ में नहीं आता कि बाकी ऐसा हाल क्यों है? अपनी मुसीबतें सरकार तक पहुंचाने के लिए अस्पृश्यों को संगठन बनाना चाहिए। हैदराबाद के नए बन रहे संविधान में अस्पृश्यों की जनसंख्या के अनुपात में योग्य प्रतिनिधित्व पाने की कोशिश करें। निजाम के प्रांत से आए अस्पृश्य आज मुझे देने के लिए जो रकम लेकर आए हैं उनकी अगर अपने काम करवाने के लिए उन्हें जरूरत हो तो वे ले जाएं। सुयोग्य सही तरीके से अपनी शिकायतों की ओर सरकार का ध्यान दिलाने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता कर सकता हूं।
डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद निम्नांकित तीन प्रस्ताव पारित हुए-
पहला प्रस्तावः यह सभा निजाम सरकार से विनती करती है कि निजाम सरकार के राज्य की सीमा में रहने वाले माफीदार महार, ढेढों को मेहनत के अनुपात में मुआवजा नहीं मिलता। इसलिए सरकारी जंगल-जमीनें देकर माफीदार महार-ढेढ लोगों के गुजारे का सवाल हल किया जाए।
दूसरा प्रस्तावः निजाम सरकार के राज्य की सीमा में रहने वाले अस्पृश्य लोगों का बुरा हाल है। सभा निजाम सरकार से विनती करती है कि सरकार की ओर से उनकी प्राथमिक शिक्षा का तुरंत प्रबंध किया जाए।
तीसरा प्रस्तावः निजाम सरकार से इस सभा की विनती है कि राज्य के नए बन रहे संविधान में निजाम राज्य की सीमा में रहने वाले अस्पृश्य प्रजा को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले।
बार्शी म्युनिसिपालिटी के अध्यक्ष और गैर-ब्राह्मणों के नेता श्री भातनकर ने आज